भारत में सदियों से पारंपरिक भोजन प्रणाली का हिस्सा रहे फर्मेंटेड फूड्स केवल स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पाचन तंत्र यानि डाइजेशन को मजबूत और बीमारियों से दूर रखने में भी मदद करते हैं।
आज जब गट हेल्थ मतलब आंतो के सेहत पर दुनियाभर में चर्चा हो रही है, तो हमें अपने ही देश के इन पुराने प्रोसेस को दोबारा पहचानने की जरूरत है जो डाइजेशन को सही रखने में मदद करते हैं।
इडली और डोसा बैटर
इडली-डोसा का बैटर दाल और चावल में खमीर उठा कर बनाया जाता है, जिससे उसमें नेचुरल प्रोबायोटिक्स विकसित होते हैं। ये आपके पाचन को बेहतर करते हैं और हल्का भोजन होने के कारण गैस और कब्ज से राहत देते हैं।
छाछ
दही से बनने वाली छाछ ठंडी, हल्की और पेट के लिए बेहद फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया आंतों को संतुलित रखते हैं और डाइजेशन को आसान बनाते हैं।
पांटा भात
ओड़िशा और बंगाल में रात भर पानी में रखे चावल को सुबह खाया जाता है। इसमें नेचुरल फर्मेंटेशन से अच्छे बैक्टीरिया बनते हैं जो गट हेल्थ को सुधारते हैं।
कांजी
काले गाजर से बनने वाली कांजी एक पारंपरिक प्रोबायोटिक ड्रिंक है। इसमें नेचुरल खमीर बनने पर यह आंतों को साफ करती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
आचार
सरसों के तेल और मसालों में लंबे समय तक रखे गए अचार फर्मेंटेड होते हैं। इनमें नेचुरल एसिड और माइक्रोबायोटा होते हैं जो गट फ्लोरा को संतुलित रखते हैं।
ढोकला
गुजरात की पहचान ढोकला भी खमीर युक्त बैटर से बनता है। यह पेट में भारी नहीं लगता और हल्का स्पंजी टेक्सचर होता है, जिससे पेट भारी नहीं होता और पूरे दिन पेट की दिक्कत से बचाता है।
उरद दाल का पिठा
पूर्वी भारत में उरद दाल से बनने वाला पिठा भी फर्मेंटेड होते हैं। ये न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि फाइबर और अच्छे बैक्टीरिया से भरपूर होते हैं। इन्हें स्टीम देकर बनाया जाता है।
खमीर की प्रक्रिया में प्राकृतिक बैक्टीरिया और यीस्ट खाद्य में ऐसे तत्व बनाते हैं जो पाचन में सुधार करते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं। फर्मेंटेड फूड्स को सही तापमान और स्वच्छता में तैयार करें। गलत तरीके से बनाया गया फर्मेंटेड फूड नुकसान भी कर सकता है।
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