सर्दियों में अक्सर हम देखते हैं कि रजाई से बाहर निकलते ही हमारे मुंह से सफेद धुएं का गुबार निकलता है। बचपन में हम इसे दोस्तों के सामने शान दिखाने के लिए करते थे – बिना माचिस या सिगरेट के ‘फूंक’ मारना और धुएँ के छोटे-छोटे छल्ले बनाना। यह दृश्य जितना मजेदार लगता है, उतना ही विज्ञान से जुड़ा हुआ भी है। वास्तव में, यह धुआँ धुएँ जैसा नहीं होता, बल्कि हमारी गर्म सांस और शरीर में मौजूद नमी का ठंडी हवा के साथ टकराने पर बनने वाला दृश्य रूप है। जब हमारी गर्म और नम सांस ठंडी हवा से मिलती है, तो उसमें मौजूद अदृश्य नमी पानी की छोटी बूंदों में बदल जाती है।
यही प्रक्रिया हमें एक छोटे बादल के रूप में दिखाई देती है। गर्मियों में यह जादू क्यों गायब हो जाता है? इसका कारण तापमान का अंतर कम होना है, जिससे नमी गैस के रूप में हवा में मिल जाती है और दिखाई नहीं देती।
हमारा शरीर: चलता-फिरता हीटर
इसलिए हमें यह सामान्य परिस्थितियों में दिखाई नहीं देती।
ठंडी हवा और गर्म सांस का जादू
सर्दियों में जब आपकी गर्म सांस बाहर की ठंडी हवा से टकराती है, तो वह अचानक ठंडी होकर छोटे-छोटे पानी की बूंदों में बदल जाती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे कंडेंसेशन (Condensation) कहते हैं। यही प्रक्रिया आसमान में बादल बनने के पीछे भी जिम्मेदार होती है। इसीलिए, आपके मुंह से जो सफेद धुआं निकलता है, वह वास्तव में एक छोटा-सा बादल होता है, धुआं नहीं।
गर्मियों में यह जादू क्यों गायब हो जाता है?
गर्मी के मौसम में बाहर का तापमान शरीर के तापमान के करीब होता है। जब आप सांस छोड़ते हैं, तो गर्म हवा को बाहर भी गर्म हवा मिलती है। तापमान में बड़ा अंतर नहीं होने के कारण नमी पानी की बूंद में बदलने का मौका नहीं पाती। यह गैस की तरह हवा में घुल जाती है, इसलिए गर्मियों में वह सफेद धुआं नजर नहीं आता।