देश के सबसे नए राज्य तेलंगाना के चुनावी मुकाबले में अलग-अलग पार्टियां अपनी ओर से पुरजोर कोशिश में जुटी हैं। इस चुनावी मैदान में कांग्रेस की अगुवाई ए रेवंत रेड्डी कर रहे हैं, जबकि बीजेपी जी किशन रेड्डी के नेतृत्व में चुना लड़ रही है। विपक्ष की तरफ से ये दो पार्टियां मुख्य दावेदार हैं। हालांकि, इन दोनों पार्टियों के नेताओं में कोई भी तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बराबरी नहीं कर सकता, जो केसीआर के नाम से जनता में लोकप्रिय हैं।
केसीआर के पास अद्भुत करिश्माई व्यक्तित्व है। देसी अंदाज में उनकी शानदार भाषण कला की वजह से जनता से उनका गजब का जुड़ाव है, जिसकी बराबरी तेलंगाना का दूसरा नेता नहीं कर सकता। दरअसल, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सुप्रीमो राव की छवि अलग राज्य के लिए आंदोलन के दौरान बनी। अलग राज्य के गठन के बाद वह लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं।
चुनावी मैदान में अब तक अपने शानदार प्रदर्शन की वजह से राव पार्टी के बाहर और भीतर निर्विवाद नेता के तौर पर उभरकर सामने आए हैं। राज्य में लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा है कि विपक्षी पार्टियों की हालत खराब है और विपक्ष की मुख्य भूमिका हासिल करने के लिए बीजेपी व कांग्रेस के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है।
केसीआर ने सही तरीके से खेले हैं अपने पत्ते
केसीआर इस बार हैट्रिक लगाने की पुरजोर कोशिश में जुटी है। इसके लिए उन्हें सरकार के विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर भरोसा है। पीने के पानी और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर उनके द्वारा किए गए काम काफी लोकप्रिय हैं। इसके अलावा भी उन्होंने कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं। केसीआर ने जातियों का भी मजबूत गठबंधन तैयार किया है, जिसमें एक तरफ सवर्ण रेड्डी और वेल्मा हैं, तो दूसरी तरफ ओबीसी जातियां हैं। इसके अलावा, वह दलितों को भी लुभाने की तैयारी में हैं, जो कुल मतदाताओं का 15 प्रतिशत हैं। मुसलमानो को लेकर भी उन्होंने खास रणनीति बनाई है।
कांग्रेस ने हासिल की खोई हुई जमीन
कर्नाटक चुनावों में हार के बाद बीजेपी का हौसला कमजोर हुआ है और इस बीच कांग्रेस, केसीआर के मुकाबले सबसे कारगर प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभरी है। कांग्रेस पार्टी केसीआर के 10 साल के शासन की वजह से सरकार विरोधी भावना को भुनाने की कोशिश कर रही है। केसीआर की पार्टी के मुख्यमंत्री का मजबूत चेहरा है, जबकि कांग्रेस और बीजेपी मुख्यमंत्री को लेकर कोई चेहरा पेश नहीं कर पाई हैं। बहरहाल, कर्नाटक की जीत के बाद कांग्रेस को नई संजीवनी मिली है। नतीजतन, राज्य में कांग्रेस के कई पुराने चेहरे बीआरएस से कांग्रेस में वापसी कर रहे हैं। साथ ही, कांग्रेस का पलड़ा बीजेपी से भारी जान पड़ता है।
कमजोर पिच पर खड़ी है बीजेपी
केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा दिल्ली शराब घोटाले में केसीआर की बेटी के. कविता को गिरफ्तार करने से बचना, राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के खिलाफ थर्ड फ्रंट बनाने के प्लान से केसीआर का हटना आदि घटनाओं से लोगों के बीच संदेश गया है कि कांग्रेस को हराने के लिए बीआरएस और बीजेपी ने युद्धविराम की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस नेतृत्व ने यह कहते हुए इस कथित युद्धविराम का जोरशोर से प्रचार करना शुरू किया है कि केसीआर और नरेंद्र मोदी एक ही पेज पर हैं। लिहाजा, सत्ता विरोधी वोट के लिए कांग्रेस एकमात्र दावेदार है।