Rajasthan Election 2023: PM-CM के मुकाबले के बीच राजस्थान में हावी है राजनीतिक सस्पेंस

बीजेपी सत्ता हासिल करने के लिए बेहद आक्रामक मूड में है, जबकि कांग्रेस भी अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए हरमुमकिन कोशिश में जुटी है। राजस्थान का चुनाव दिग्गजों की लड़ाई बन चुका है। दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के अलावा, कई और मुद्दे भी इस चुनाव में शामिल हैं, जिससे इस राज्य के चुनाव में बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल सकता है

अपडेटेड Oct 09, 2023 पर 5:29 PM
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राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस का वन मैन शो है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव को 'सर्दियों का बड़ा मुकाबला' के तौर पर पेश किया जा रहा है। बीजेपी सत्ता हासिल करने के लिए बेहद आक्रामक मूड में है, जबकि कांग्रेस भी अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए हरमुमकिन कोशिश में जुटी है। राजस्थान का चुनाव दिग्गजों की लड़ाई बन चुका है। दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के अलावा, कई और मुद्दे भी इस चुनाव में शामिल हैं, जिससे इस राज्य के चुनाव में बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल सकता है।

बीजेपी का हिंदुत्व पर जोर, गुटबाजी का संकट

पिछले तीन दशक से राजस्थान में सत्ताधारी पार्टी के चुनाव हारने का ट्रेंड रहा है और बीजेपी इस भावना का फायदा उठाने की हरमुमकिन कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी के चुनावी अभियान का चेहरा हैं और पार्टी समर्थन जुटाने के लिए गोलबंदी की कोशिश भी कर रही है। पार्टी पिछले 5 साल में हुई सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं का हवाला देकर गहलोत सरकार पर 'तुष्टिकरण की राजनीति' का आरोप लगा रही है। गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा मतदाताओं की गोलबंदी के लिए आक्रामक रणनीति अख्तियार कर रहे हैं। पार्टी ने हाल में पूरे राज्य में जो परिवर्तन यात्रा निकाली थी, उसका मुख्य थीम यही था।

हालांकि, आक्रामक अभियान के बावजूद पार्टी राज्य में नेतृत्व संकट का सामना कर रही है। पार्टी का अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ चुका है और इस वजह से पार्टी को वोटरों से जुड़ाव हासिल करने में बाधा आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की लोकप्रियता को नजरअंदाज करते हुए उन्हें किनारे कर दिया गया है। इसके बजाय पार्टी में सीएम बनने की हसरत रखने वाले कई लोग हैं, मसलन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत और अर्जुन मेघवाल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अर्जुन राठौड़ और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया। अंदरूनी कलह की वजह से बीजेपी पिछले साल में कोई भी मजबूत आंदोलन नहीं कर पाई और न ही उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकी।


कांग्रेस का गहलोत शो, पायलट का डर

बीजेपी के उलट राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस का वन मैन शो है। उन्होंने पूरी स्वतंत्रता मिली हुई है और पार्टी उनकी कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा कर रही है। राज्य में हर 5 साल पर सरकार बदलने की परंपरा के बावजूद कोविड महामारी से निपटने के उनके तौर-तरीकों को जीत के हिसाब से काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, पिछले 5 साल में गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच तनाव की खबरें लगातार मिलती रहीं। साल 2020 में पायलट के विद्रोह ने कांग्रेस सरकार पर संकट पैदा कर दिया था। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में सचिव पायलट का क्या असर होगा, यह देखना इस चुनाव में बेहद दिलचस्प होगा। पूर्वी राजस्थान में गुर्जर वोट काफी अहम हैं। पायलट भी इसी समुदाय से आते हैं।

हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल के महीनों में सुलह की पहल की है, लेकिन गहलोत-पायलट के बीच विवाद का मसला अब भी लोगों के दिलो-दिमाग में छाया है और गर्वनेंस के बेहतर रिकॉर्ड के बावजूद इसका असर चुनाव में देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, भर्ती परीक्षाओं में पर्चा लीक होने के मामले और रोजगार के मोर्चे पर चुनौतियां युवा वोटरों को प्रभावित कर सकती हैं।

पीएम-सीएम का मुकाबला

ऐसा लगता हैकि इस चुनावी मुकाबला पीएम-सीएम आमने-सामने हैं। बीजेपी ने इस बार मुख्यमंत्री का कोई चेहरा पेश नहीं किया है और वोटों के लिए मोदी मैजिक पर भरोसा कर रही है। ऐसे में पीएम मोदी और सीएम गहलोत के बीच सीधा आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहा है। जब मोदी ने 'लाल डायरी' का मुद्दा उठाया, तो सीएम ने उन्हें कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर घेरेत हुए 'लाल टमाटर' पर फोकस करने की सलाह दी। 'लाल डायरी' का मामला गहलोत के कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।

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