Assembly Election 2023: चुनावी रेवड़ियों के अर्थशास्त्र पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

मुफ्त की रेवड़ियां बांटने को लेकर बहस नई नहीं है। कुछ एक्सपर्ट्स और रिजर्व बैंक जैसे संस्थान भी इसको लेकर चिंता जता चुके हैं। इन राज्यो में एक अहम ऐलान पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर है। छत्तीसगढ़ जहां पहले ही इस फैसले को लागू कर चुका है, वहीं मिजोरम सरकार भी इस आइडिया को लागू करने पर विचार कर रही है

अपडेटेड Nov 07, 2023 पर 7:10 PM
Assembly Elections 2023 LIVE: छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान के बाद दूसरे चरण के लिए वोटिंग 17 नवंबर को होगी।

मिजोरम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूरा हो चुका है, ,जबकि छत्तीसगढ़ में पहले चरण की वोटिंग हुई है। इसके बाद, मनीकंट्रोल (Moneycontrol) ने इस चुनावी सीजन में कल्याणकारी योजनाओं या मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर हुए ऐलानों का जायजा लिया है। पिछले कुछ महीनों में राजनीतिक पार्टियों ने कई तरह के लुभावने वादे किए हैं, जिनमें महिलाओं के लिए आरक्षण, इनकम गारंटी स्कीम, मुफ्त शिक्षा संबंधी लोक-लुभावने वादे शामिल हैं।

दोनों राज्यों में कांग्रेस और बीजेपी ने वोटरों को लुभावने के लिए अपने-अपने घोषणा पत्रों में कई तरह के वादे किए हैं। खनिद संपदा के मामले में अमीर राज्य छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और वहां सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है।

छत्तीसगढ़ की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने 'भरोसे का घोषणा पत्र 2023-28' शीर्षक से घोषणा पत्र जारी किया है, जिसमें ऊंची कीमतों पर धान की खरीद, कर्जमाफी, केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा, सभी महिलाओं को रसोई गैस पर 500 रुपये की सब्सिडी और 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने का वादा किया गया है।


घोषणाओं के मामले में राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी भी पीछे नहीं है। बीजेपी के घोषणा पत्र में 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर देने, दो साल में एक लाख युवाओं को सरकार नौकरियां देने, विवाहित महिलाओं को 12,000 रुपये तक की सालाना वित्तीय सहायता और 3,100 रुपये प्रति क्विंटल पर धान खरीद जैसे वादे शामिल हैं।

दूसरी तरफ, उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम में मुकाबला मुख्य रूप से सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट और मुख्य विपक्षी पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट के बीच है। इस रांज्य में कांग्रेस और बीजेपी तीसरी और चौथे नंबर पर है। कांग्रेस का कहना है कि अगर पार्टी चुनाव जीतती है, तो वह 750 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराएगी।

साथ ही, पार्टी ने बुजुर्गों को हर महीने 2,000 रुपये की पेंशन और राज्य की जनता को 15 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस देने का वादा किया है। दूसरी तरफ, बीजेपी ने 1 रुपये प्रति किलो चावल देने, सभी बेघर लोगों को घर मुहैया कराने, सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 पर्सेंट आरक्षण, हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने जैसे वादे किए हैं।

रेवड़ियों का अर्थशास्त्र

मुफ्त की रेवड़ियां बांटने को लेकर बहस नई नहीं है। कुछ एक्सपर्ट्स और रिजर्व बैंक जैसे संस्थान भी इसको लेकर चिंता जता चुके हैं। इन राज्यो में एक अहम ऐलान पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर है। छत्तीसगढ़ जहां पहले ही इस फैसले को लागू कर चुका है, वहीं मिजोरम सरकार भी इस आइडिया को लागू करने पर विचार कर रही है। रिजर्व बैंक ने सितंबर के अपने बुलेटिन में कहा था कि राज्य सरकारों द्वारा पुरानी पेंशन को लागू करना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं होगा।

कुछ राज्यों द्वारा पुरानी स्कीम की तरफ लौटने से चिंतित केंद्र सरकार ने फाइनेंस सेक्रेटरी टी वी सोमनाथन की अगुवाई में कमेटी बनाई है, जो सरकारी एंप्लॉयीज के पेंशन से जुड़े मसलों की पड़ताल करेगी। रेवड़ियां बांटने की संस्कृति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंता जा चुके हैं। सितंबर में मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि 'वित्तीय रूप से गैर-जिम्मेदार स्कीम्स' से बचने की जरूरत है।

हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स इस मामले में अलग राय रखते हैं। जेपी मॉर्गन (JP Morgan) के जहांगीर अजीज का मानना है कि ऐसे कुछ कदमों से इकनॉमी पर पॉजिटिव असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि ऐसे कैश ट्रांसफर का साइज इतना बड़ा नहीं है कि इससे देश का फिस्कल गणित गड़बड़ हो जाए। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने भी इन वादों का बचाव करते हुए कहा कि इससे जनता का सशक्तिकरण सुनिश्चित होता है।

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