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Amalaki Ekadashi 2025: इस बार विशेष संयोग में पड़ेगी आमलकी एकादशी, जानें व्रत का महत्व और पूजा विधि

Amalaki Ekadashi 2025: आमलकी एकादशी 2025, जिसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं, 10 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। काशी में शिव-पार्वती की भव्य पूजा होती है। व्रत से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूजा, जागरण और भजन-कीर्तन शुभ माने जाते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 02, 2025 पर 8:51 AM
Amalaki Ekadashi 2025: इस बार विशेष संयोग में पड़ेगी आमलकी एकादशी, जानें व्रत का महत्व और पूजा विधि
Amalaki Ekadashi 2025: कब है आमलकी एकादशी 2025?

आमलकी एकादशी, जिसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। ये एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है और होली से चार दिन पहले मनाई जाती है। इस वर्ष आमलकी एकादशी 10 मार्च 2025, सोमवार को पड़ेगी। ये व्रत उत्तम स्वास्थ्य, सौभाग्य और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है। काशी में इसे रंगभरी एकादशी के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाता है, जहां भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा होती है।

इस साल एकादशी तिथि 9 मार्च, रविवार सुबह 7:45 बजे से 10 मार्च, सोमवार सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा।

आमलकी एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत को करने से हजारों यज्ञों और तीर्थ यात्राओं के बराबर पुण्य मिलता है। भगवान विष्णु की कृपा से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस व्रत को करने से न सिर्फ मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है, बल्कि व्यापार, करियर और व्यक्तिगत जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आते हैं।

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