मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। उन्हें त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अंश स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन उनका जन्म हुआ था। भगवान दत्तात्रेय ईश्वर और गुरु के रूप में पूजनीय हैं, इसलिए उन्हें “श्रीगुरुदेवदत्त” कहा जाता है। श्रीमद्भागवत में वर्णन है कि उन्होंने प्रकृति, मनुष्य और पशु-पक्षियों से प्रेरणा लेते हुए 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की। भगवान दत्तात्रेय को ज्ञान, त्याग और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। उनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है।
दत्तात्रेय जयंती 2024 का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:23 से 5:51 तक रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11:49 से 15 दिसंबर को रात 12:44 तक होगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:48 से 12:39 तक रहेगा। इसके अलावा, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:06 से 15 दिसंबर की सुबह 3:54 तक रहेगा। इन शुभ समयों के दौरान भगवान दत्तात्रेय की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
दत्तात्रेय जयंती पूजा विधि
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें। इसके लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।
दत्तात्रेय जयंती का महत्व
भगवान दत्तात्रेय, जो तीन मुख और तीन भुजाओं वाले हैं, महर्षि अत्रि और अनुसूया के पुत्र हैं। उन्होंने प्रकृति, मनुष्य और पशु-पक्षियों को मिलाकर 24 गुरुओं का निर्माण किया। उनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। उनके जन्मदिवस पर पूजा-पाठ और व्रत शीघ्र फलदायी माने जाते हैं।