Dattatreya Jayanti 2024: दत्तात्रेय जयंती पर ऐसे करें पूजा, मिलेगा पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। त्रिदेवों के अंश माने जाने वाले दत्तात्रेय ज्ञान, त्याग और भक्ति के प्रतीक हैं। पूजा, व्रत और मंत्र जाप इस दिन अत्यंत शुभ होते हैं। गोधूलि मुहूर्त व अन्य शुभ समयों में पूजा कर सुख-समृद्धि, शांति और कष्टों से मुक्ति पाई जाती है

अपडेटेड Dec 14, 2024 पर 12:26 PM
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दत्तात्रेय जयंती 2024

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। उन्हें त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अंश स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन उनका जन्म हुआ था। भगवान दत्तात्रेय ईश्वर और गुरु के रूप में पूजनीय हैं, इसलिए उन्हें “श्रीगुरुदेवदत्त” कहा जाता है। श्रीमद्भागवत में वर्णन है कि उन्होंने प्रकृति, मनुष्य और पशु-पक्षियों से प्रेरणा लेते हुए 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की। भगवान दत्तात्रेय को ज्ञान, त्याग और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। उनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है।

दत्तात्रेय जयंती 2024 का शुभ मुहूर्त


हिंदू पंचांग के अनुसार, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:23 से 5:51 तक रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11:49 से 15 दिसंबर को रात 12:44 तक होगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:48 से 12:39 तक रहेगा। इसके अलावा, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:06 से 15 दिसंबर की सुबह 3:54 तक रहेगा। इन शुभ समयों के दौरान भगवान दत्तात्रेय की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

दत्तात्रेय जयंती पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा व्रत का संकल्प लें।
  • शाम को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति स्थापित करें।
  • भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं और सफेद चंदन व कुंकुम से तिलक करें। फूल और माला चढ़ाएं।
  • शुद्ध घी का दीपक जलाएं और भगवान को तुलसी पत्र व पंचामृत अर्पित करें।
  • व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती कर क्षमा याचना करें।

जाप करने योग्य मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें। इसके लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।

  1. ॐ द्रांदत्तात्रेयाय नमः।
  2. दिगंबरा-दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।
  3. ऊं ह्रीं विद्दुत जिव्हाय माणिक्यरुपिणे स्वाहा।
  4. ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमही तन्नो दत: प्रचोदयात।

दत्तात्रेय जयंती का महत्व

भगवान दत्तात्रेय, जो तीन मुख और तीन भुजाओं वाले हैं, महर्षि अत्रि और अनुसूया के पुत्र हैं। उन्होंने प्रकृति, मनुष्य और पशु-पक्षियों को मिलाकर 24 गुरुओं का निर्माण किया। उनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। उनके जन्मदिवस पर पूजा-पाठ और व्रत शीघ्र फलदायी माने जाते हैं।

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