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Kartik Purnima 2024 Date: कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहा है खास संयोग, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि

Kartik Purnima 2024 Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्‍व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्‍णु के साथ ही भगवान शिव की पूजा भी की जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को "त्रिपुरी पूर्णिमा" भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, जो देवताओं के लिए संकट बन चुका था

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 15, 2024 पर 7:28 AM
Kartik Purnima 2024 Date: कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहा है खास संयोग, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि
Kartik Purnima 2024 Shubh Muhurat: 15 नवंबर 2024 को इस साल कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है।

कार्तिक महीने के आखिरी में आने वाली पूर्णिमा का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 15 नवंबर को मनाई जाएगी। इसे "त्रिपुरी पूर्णिमा" या "गंगा स्नान पूर्णिमा" भी कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान, दीपदान और पूजा का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा को पंचांग की सबसे पवित्र तिथि माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि दैवीय कृपा और ऊर्जा से भरी होती है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से पुण्य मिलता है। व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।

कार्तिक पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर 2024 को सुबह 06.19 बजे से शुरू हो जाएगी। इस तिथि का समापन 16 नवंबर 2024 को रात 02.58 बजे होगा। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर शुभ संयोग बन रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रमा और मंगल एक-दूसरे की राशि में रहेंगे। राशि परिवर्तन योग बनाएंगे। इस दिन गजकेसरी योग और बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है। साथ ही इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर शश राजयोग का शुभ संयोग भी बना हुआ है।

पूर्णिमा तिथि का महत्व

पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है। इस तिथि के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा समसप्तक होते हैं। जल और वातावरण में विशेष ऊर्जा आ जाती है। लिहाजा नदियों और तालाबों में स्नान करना शुभ माना गया है। कार्तिक की पूर्णिमा के स्नान से नौ ग्रहों की कृपा.आसानी से मिल सकती है। इस दिन स्नान, दान और ध्यान विशेष फलदायी माना गया है। कार्तिक पूर्णिमा को लेकर पौराणिक कथा भी है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था। इसलिए इस पूर्णिमा को त्रिपुरासुर पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा तक भगवान विष्णु मत्स्य रूप में जल में रहते हैं। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा पर जल में दीप प्रवाहित करने की बड़ी मान्यता है।

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