Lohri 2025:12 या 13 जनवरी किस दिन मनाई जाएगी लोहड़ी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Lohri 2025: पौष माह में लोहड़ी का खास महत्व है, जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है। यह त्योहार फसल की कटाई और नई फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अलाव जलाकर नाच-गाना, मिठाइयां बांटना, और अग्नि देव की पूजा की जाती है। 2025 में लोहड़ी 13 जनवरी को होगी, जिसमें भद्रावास और रवि योग का संयोग है

अपडेटेड Jan 05, 2025 पर 4:54 PM
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Lohri 2025: लोहड़ी उत्तर भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है।

हिंदू धर्म में पौष मास का विशेष महत्व होता है और इस दौरान कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। जिनमें लोहड़ी भी एक है। यह हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है, जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। खासकर उत्तर भारत में पंजाब और हरियाणा में इस दिन धूमधाम से लोहड़ी मनाई जाती है। यह त्योहार फसल की कटाई और नई फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है। लोहड़ी पर लोग अलाव जलाकर उसके चारों ओर इकट्ठा होते हैं और नाच-गाना करते हैं। अलाव में रेवड़ी, मूंगफली, खील, गुड़ और गेहूं की बालियां चढ़ाकर अग्नि देव की पूजा की जाती है, ताकि घर में सुख-शांति और समृद्धि आए।

इस दिन परंपरागत रूप से परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने, मिठाइयां बांटने और उपहार देने का रिवाज है। नवविवाहित जोड़ों और नवजात बच्चों के लिए यह दिन खास होता है।

लोहड़ी कब है?


वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में सूर्य 14 जनवरी को सुबह 8:44 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति उसी दिन मनाई जाएगी। लोहड़ी एक दिन पहले, यानी 13 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन संक्रांति तिथि सुबह 9:03 बजे से शुरू होगी।

लोहड़ी का महत्व

लोहड़ी के दिन शाम को अलाव जलाकर उसके चारों ओर लोग इकट्ठा होते हैं। नाच-गाना, भांगड़ा और गिद्धा के बिना लोहड़ी अधूरी लगती है। अलाव में रेवड़ी, मूंगफली, खील, गुड़, और गेहूं की बालियां चढ़ाई जाती हैं, ताकि अग्नि देव को प्रसन्न किया जा सके। यह त्योहार परिवार और दोस्तों के साथ मनाने का दिन है। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए यह त्योहार खास शुभ माना जाता है।

लोहड़ी के शुभ योग

इस साल लोहड़ी के दिन भद्रावास योग और रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। भद्रावास योग शाम 4:26 बजे तक रहेगा। ऐसी मान्यता है कि इन शुभ योगों में अग्नि देव की पूजा करने से घर में धन और अन्न की बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा, इस दिन आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जो इसे और खास बनाता है। इन शुभ योगों में पूजा-पाठ करना बहुत फलदायी माना गया है।

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