Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में छा गए ‘चाय वाले बाबा’, घोड़े वाले बाबा भी किसी से कम नहीं

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ 2025 में कई अनोखे बाबा आकर्षण का केंद्र बने हैं, जिनकी अद्भुत साधनाएं और विचित्र जीवनशैली महाकुंभ के माहौल को खास बना रही हैं। बांसुरी वाले बाबा, चायवाले बाबा, राधे पुरी बाबा, और पर्यावरण बाबा जैसे अनोखे बाबा श्रद्धालुओं को न केवल हैरान करते हैं, बल्कि उन्हें प्रेरित भी करते हैं

अपडेटेड Jan 12, 2025 पर 6:56 PM
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महाकुंभ 2025 मेले में पहुंच रहे हैं अजब-गजब साधु-संत

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ 2025 इस बार कुछ खास और अद्भुत अनुभवों से भरा हुआ है। संगम की रेत पर साधु-संतों की साधनाओं का अनोखा संगम हो रहा है, जो हर किसी को हैरान कर रहा है। इस बार कुछ अजीब और दिलचस्प बाबा आए हैं, जिनकी साधना और जीवनशैली ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। ये बाबा अपनी अलग-अलग आदतों और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। बांसुरी वाले बाबा से लेकर चायवाले बाबा तक, इनकी हर विशेषता महाकुंभ के माहौल को और भी रोचक बना रही है।

इन बाबाओं की साधनाएं और विचित्र कार्य न केवल श्रद्धालुओं को हैरान करते हैं, बल्कि उन्हें नई प्रेरणा भी देते हैं। महाकुंभ 2025 में इन बाबाओं की उपस्थिति ने इस अनोखे पर्व को और भी रंगीन और आकर्षक बना दिया है।

बांसुरी वाले बाबा


2025 महाकुंभ में श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के बांसुरी वाले बाबा खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जब वह शोभायात्रा में बांसुरी बजाते हैं, तो उनका संगीत हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। उनकी बांसुरी की धुनों में आस्था, भक्ति और आनंद का अद्वितीय मिश्रण है, जो भक्तों के दिलों को छू जाता है। बांसुरी वाले बाबा की ध्वनि महाकुंभ की सुंदरता में चार चांद लगा रही है।

चायवाले बाबा

इस महाकुंभ में एक और दिलचस्प बाबा सुर्खियों में हैं, जिनका नाम है चायवाले बाबा। उनका असली नाम दिनेश स्वरूप ब्रह्मचारी है। वह पिछले 40 वर्षों से मौन व्रत धारण किए हुए हैं और ठोस भोजन के बिना केवल 10 कप चाय पीकर जीवित रहते हैं। उनके बारे में सबसे खास बात यह है कि वह IAS बनने की तैयारी कर रहे छात्रों को मुफ्त कोचिंग देते हैं और व्हाट्सएप के माध्यम से उनका मार्गदर्शन करते हैं। चायवाले बाबा ने छात्रों के लिए एक नई प्रेरणा का स्रोत बनकर महाकुंभ में अपने अद्भुत योगदान को प्रस्तुत किया है।

राधे पुरी बाबा 

उज्जैन के राधे पुरी बाबा ने 2011 से एक अद्भुत तपस्या शुरू की थी, जिसमें वे अपना एक हाथ लगातार 14 साल से उठाए रखते हैं। इस हठ योग को देखकर लोग दंग रह जाते हैं। यह साधना उन्हें संसार के कल्याण के लिए समर्पित है। राधे पुरी बाबा का ये तप उनकी आत्म-विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।

घोड़े वाले बाबा

महाकुंभ के इस विशेष अवसर पर जयपुरी बाबा 'घोड़े वाले बाबा' के नाम से प्रसिद्ध हो गए हैं। बाबा घोड़े पर सवार होकर महाकुंभ क्षेत्र में यात्रा करते हैं। उनके साथ चार घोड़े भी हैं, जिन्हें उन्होंने बरेली से लेकर महाकुंभ में लाया है। घोड़े पर उनकी यात्रा को देखकर लोग उन्हें अद्भुत मानते हैं और उनके इस अनोखे अंदाज को देखकर सब दंग रह जाते हैं।

पर्यावरण बाबा

अरुण गिरि महाराज, जिन्हें पर्यावरण बाबा के नाम से जाना जाता है, महाकुंभ में सोने के कंगन और हीरे की घड़ी पहनकर आते हैं। लेकिन उनकी असली पहचान पर्यावरण के प्रति उनके समर्पण से है। वह अब तक एक करोड़ से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं और इस महाकुंभ में 50,000 फलदार पौधे श्रद्धालुओं को वितरित करने की योजना बना रहे हैं। पर्यावरण बाबा का उद्देश्य हर व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करना है।

गीतानंद गिरी 

गीतानंद गिरी बाबा ने 12 साल तक प्रतिदिन सवा लाख रुद्राक्ष धारण करने का संकल्प लिया था। अब उनके शरीर पर 2 लाख रुद्राक्ष हैं, जिनका कुल वजन 45 किलो से भी ज्यादा है। इस तपस्या को देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। बाबा श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े के सेक्रेटरी भी हैं और उनकी साधना सनातन धर्म की सेवा के प्रति गहरी समर्पण को दिखाता है।

फेड्रिक ब्रूनो गिरी

फ्रांस के गणित प्रोफेसर फेड्रिक ब्रूनो अब महाकुंभ में ब्रह्मचारी की दीक्षा लेकर सनातनी संत बन गए हैं। उनका कहना है कि वे अंकगणित में जीवनभर का अनुभव प्राप्त कर चुके हैं, लेकिन अब वे आत्मिक शांति की तलाश में हैं। जीवन के अंतिम सत्य को जानने की इच्छा ने उन्हें महाकुंभ की ओर आकर्षित किया है।

इन सभी अनोखे बाबाओं की तपस्याएं और साधनाएं महाकुंभ के अद्भुत माहौल में एक नया आकर्षण और गहराई जोड़ रही हैं। इन बाबाओं के अद्भुत रूप और साधनाएं महाकुंभ के इस धार्मिक महोत्सव में एक नया रंग भर रही हैं, जो सभी को हैरान और प्रेरित कर रही हैं।

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