प्रयागराज महाकुंभ में दीक्षा लेने वाली 13 साल की लड़की का संन्यास 6 दिन में ही वापस हो गया। दीक्षा दिलाने वाले महंत कौशल गिरि को जूना अखाड़े ने 7 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने नाबालिग को गलत तरीके से शिष्या बनाया था। यह खबर भारत में सबसे बड़े हिंदू मठवासी संघ जूना अखाड़े को भी पसंद नहीं आई थी। संगठन के एक ‘महंत’ ने किशोरी को ‘साध्वी’ के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक हरि गिरि महाराज ने कहा कि यह अखाड़े की परंपरा नहीं रही है कि किसी नाबालिग को संन्यासी बना दिया जाए।
