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Maha Kumbh: नाबालिग साध्वी का संन्यास वापस, जूना अखाड़े ने महंत कौशल किया बाहर, गलत ढंग से बनाया था शिष्या

Mahakumbh Mela 2025: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के गांव टरकपुरा की राखी जूना अखाड़े की दीक्षा लेकर साध्वी बन गई थीं। इस बीच 13 साल की नाबालिग को साध्वी बनाकर दान के रूप में हासिल करने वाले जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरि पर गाज गिर गई है। उन्हें अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 12, 2025 पर 12:08 PM
Maha Kumbh: नाबालिग साध्वी का संन्यास वापस, जूना अखाड़े ने महंत कौशल किया बाहर, गलत ढंग से बनाया था शिष्या
Mahakumbh Mela 2025: संत समाज ने कन्यादान की इस परंपरा का विरोध किया था। जिसके बाद जूना अखाड़े ने कड़ा एक्शन लिया।

प्रयागराज महाकुंभ में दीक्षा लेने वाली 13 साल की लड़की का संन्यास 6 दिन में ही वापस हो गया। दीक्षा दिलाने वाले महंत कौशल गिरि को जूना अखाड़े ने 7 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने नाबालिग को गलत तरीके से शिष्या बनाया था। यह खबर भारत में सबसे बड़े हिंदू मठवासी संघ जूना अखाड़े को भी पसंद नहीं आई थी। संगठन के एक ‘महंत’ ने किशोरी को ‘साध्वी’ के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक हरि गिरि महाराज ने कहा कि यह अखाड़े की परंपरा नहीं रही है कि किसी नाबालिग को संन्यासी बना दिया जाए।

इस मामले एक बैठक की गई। जिसमें नाबालिग लड़की को घर वापस भेजने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है। इससे पहले साध्वी के नाबालिग बनने पर सोशल मीडिया में बवाल शुरू हो गया है। हालांकि कुछ ज्यादा गंभीर समस्या आती कि इससे पहले ही अखाड़े ने समस्या का समाधान कर दिया।

महिलओं के संन्यासी बनने की उम्र में बदलाव

कई मीडिया रिपोर्ट्स में वरिष्ठ पदाधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि नाबालिग लड़की को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया है। अखाड़े मे मौजूदा समय में महिलाओं के लिए संन्यासी बनने की उम्र में बदलाव कर दिया गया है। 22 साल की उम्र में महिलाएं संन्यास ले सकती हैं। इससे पहले संन्यास लेने की उम्र 17 साल तय थी। जिसे अब बढ़ाकर 22 साल कर दिया गया है। दीक्षा देने वाले महंत का कहना है कि लड़की के माता-पिता ने स्वच्छा से अखाड़े को समर्पित किया था। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नाबालिग लड़की के दीक्षा लेने पर माता-पिता को कोई आपत्ति नहीं थी। नाबालिग लड़की का नाम राखी है। दीक्षा देने के बाद उसका नाम बदलकर गौरि गिरी कर दिय गया था।

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