Mahakumbh 2025: उत्तर प्रदेश के संगम नगरी प्रयागराज में विश्व के सबसे बड़े मेले महाकुंभ का आज से शुरू हो गया है। आस्था के इस महापर्व का समापन 26 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन होगा। कहा जाता है कि महाकुंभ के वक्त प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में शाही स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। महाकुंभ के इस मेले में शामिल होने के लिए दूर-दूर से साधु-संत और श्रद्धालु आए है। इस बार का महाकुंभ काफी खास है, क्योंकि इस बार के महाकुंभ में 144 सालों के बाद एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। जो इसके महत्व को और ज्यादा बढ़ा देता है।
ऐसा माना जाता है कि महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसके सभी पाप भी खत्म हो जाते हैं। महाकुंभ का आयोजन 12 वर्षों के अंतराल पर हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में होता है, जिसमें प्रयागराज का महाकुंभ सबसे ज्यादा भव्य होता है। महाकुंभ में आज पहला शाही स्नान है।
144 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
इस बार का प्रयागराज का महाकुंभ बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि 144 साल बाद इस महाकुंभ में एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। यह संयोग समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है, जिसमें देवताओं और राक्षसों ने अमृत के लिए संघर्ष हुआ था। इस दिन सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रहों की शुभ स्थिति बन रही है, जो समुद्र मंथन के समय भी बनी थी। महाकुंभ के दिन रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। यह योग सुबह 7:15 बजे शुरू होगा और 10:38 बजे समाप्त होगा। साथ ही भद्रावास योग का भी संयोग बन रहा है।
13 जनवरी 2025: पहला शाही स्नान।
14 जनवरी 2025: मकर संक्रांति को दूसरा शाही स्नान।
29 जनवरी 2025: मौनी अमावस्या को तीसरा शाही स्नान।
2 फरवरी 2025: बसंत पंचमी को चौथा शाही स्नान।
12 फरवरी 2025: माघ पूर्णिमा को पांचवां शाही स्नान।
26 फरवरी 2025: महाशिवरात्रि को अंतिम शाही स्नान।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को सुबह 5:03 बजे हुई है और यह तिथि 14 जनवरी को रात 3:56 बजे समाप्त होगी। आज शाही स्नान के लिए सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 से 6:21 तक था। इसके बाद प्रातः संध्या मुहूर्त में स्नान किया जा सकता है जिसका समय सुबह 5:54 से 7:15 तक बताया गया है।
महाकुंभ में इन बातों का रखें ख्याल
प्रयागराज में आयोजित होने वाला महाकुंभ सबसे खास और बड़ा इसलिए माना जाता है क्योंकि यह गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर होता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दौरान लाखों लोग यहां स्नान करने आते हैं, जहां पर उनको महाकुंभ के नियमों का पालन करना होता है। महाकुंभ मेले में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को सादगी और सरलता से जीवन व्यतीत करना चाहिए। मेले में सबसे पहले स्नान साधु-संतों करने के बाद आम लोग स्नान करते हैं। वहीं महाकुंभ में शामिल होने वाले लोगों को स्नान के लिए निर्धारित समय का पालन करना भी अनिवार्य है। इस दौरान अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है। महाकुंभ में नशीली वस्तुओं का सेवन, हिंसा और आक्रोश का प्रदर्शन पूरी तरह वर्जित है।