महाकुंभ मेला हिंदूओं का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक मेला है। इस बार साल 2025 में कुंभ मेला लगने वाला है। यह 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा और 25 फरवरी 2025 तक चलेगा। महाकुंभ मेला 45 दिनों तक चलता है। इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर तैयारी की गई हैं। यह तैयारियां अब आखिरी पड़ाव पर हैं। इस बीच सरकार ने महाकुंभ मेले के लिए ऐप भी लॉन्च किया है। इसका नाम ‘महाकुंभ मेला 2025 ऐप’ है। इस ऐप के जरिए प्रयागराज में पूरा मेला घूम सकते हैं। इसमें सारी जानकारी मुहैया कराई गई है।
इस ऐप पर लोगों को महाकुंभ के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी। इसके अलावा महाकुंभ और कुंभ पर लिखी गई किताबों और ब्लॉग्स के जरिए महाकुंभ की परंपराओं और इसके महत्व के विषय में अधिक जानकारी हासिल कर सकते हैं। मेला अथॉरिटी की ओर से इस ऐप को लाइव किया जा चुका है। लोग इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड भी कर सकते हैं।
महाकुंभ मेला ऐप की खासियत
महाकुंभ के ब्लॉग सेक्शन में यूपी टूरिज्म की एक्सप्लोर प्रयागराज को भी स्थान दिया गया है। जिसमें संगमनगरी की आध्यात्मिकता और आधुनिकता के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें प्रयागराज का परिचय देने के साथ-साथ प्रयागराज में आकर्षण के केंद्रों और प्रयागराज की मशहूर हस्तियों के बारे में जिक्र किया गया है। इसके अलावा इस ऐप में आईआईएम समेत कई बड़े संस्थानों की महाकुंभ को लेकर की गई रिपोर्ट भी पब्लिश की गई है। इसके जरिए जो लोग महाकुंभ पर रिसर्च करना चाहते हैं, उन्हें बड़ी मदद मिल सकती है। इस ऐप में पेंट माय सिटी, स्वच्छ कुंभ, प्रयागराज स्मार्ट सिटी, स्मार्ट फ्यूचर और द मैग्नीफिसेंस ऑफ कुंभ जैसे स्टडी रिपोर्ट भी मिल जाएगी। इससे प्रयागराज और महाकुंभ को समझने में आसानी होगी।
महाकुंभ मेला ऐप 2025 का ऐसे करें इस्तेमाल
1 - महाकुंभ मेलो 2025 ऐप के जरिए धार्मिक स्थलों की सटीक स्थिति की जानकारी हासिल कर सकते हैं।
2 - महाकुंभ मेला 2025 ऐप के जरिए से धार्मिक स्थलों की सही लोकेशन मिल जाएगी।
3 - इसके लिए सबसे पहले अपने फोन में प्ले स्टोर ओपन करके ऐप को डाउनलोड करना होगा।
4 - महाकुंभ मेला 2025 Wप ओपन करने पर इसके होमपेज पर 'प्लान योर पिलग्रिमेज' सेक्शन में श्रद्धालु 'गेट डायरेक्शन टू घाट' विकल्प का चयन कर सकते हैं।
3 – इसके बाद प्रयागराज के सात प्रमुख घाटों जैसे दशाश्वमेध घाट, किला घाट, रसूलाबाद घाट, सरस्वती घाट, नौकायन घाट, महेवा घाट और ज्ञान गंगा घाट जाने का रास्ता मिल जाएगा। का मार्गदर्शन का विकल्प दिखेगा।
4- फिर आपको जिस भी घाट का दौरा करना है, उसके ऑप्शन को सिलेक्ट करके, डायरेक्शन फॉलो कर सकते हैं। इससे आप आसानी से किसी भी जगह पहुंच सकते हैं।
महाकुंभ स्नान से अमृत मिलता है
बता दें कि महाकुंभ का संबंध समुद्र मंथन से जुड़ा है। समुद्र मंथन के दौरान अमृत पाने के लिए देव और दानवों में 12 दिन तक लगातार युद्ध चला था। विष्णु के कहने पर गरुड़ ने अमृत का कलश ले लिया। असुरों ने जब गरुड़ से अमतृ कलश छीनने की कोशिश की तो उस पात्र में से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिरीं थी. यहही वजह है कि महाकुंभ के दौरान हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहबाद में त्रिवेणी संगम पर स्नान किया जाता है। मान्यता है कि इससे अमृत की प्राप्ति होती है।