Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ मेले के दौरान कौन-सा व्रत-त्योहार कब है? यहां देखिए पूरी लिस्ट

Prayagraj Mahakumbh 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले साल महाकुंभ मेले का आयोजन होना है। यह मेला 13 जनवरी से शुरू हो जाएगा और 26 फरवरी को खत्म होगा। इस दौरान कई शाही स्नान भी होंगे। वहीं व्रत त्योहार भी मनाए जाएंगे। आइये जानते हैं महाकुंभ मेले के दौरान कौन – कौन से व्रत त्योहार आ रहे हैं

अपडेटेड Dec 03, 2024 पर 1:06 PM
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Prayagraj Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेले का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह 45 दिन तक चलेगा।

किसी एक जगह पर हर 12 साल पर आयोजित होने वाला कुंभ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। हर 12 साल में महाकुंभ मेले का आयोजन होता है। इस बार कुंभ मेला 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा। यह 26 फरवरी 2025 को खत्म होगा। कहा जाता है कि इसमें एक बार स्नान करने से भक्तों के सभी पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकुंभ मेले के दौरान कई व्रत और त्योहार भी आ रहे हैं। इस मुहूर्त पर स्नान करना बेहद शुभ माना गया है।

कुंभ मेला हर तीन साल में एक एक बार उज्जैन, प्रयागराज, हरिद्वार और नासिक में आयोजित होता है। अर्ध कुंभ मेला 6 साल में एक बार हरिद्वार और प्रयागराज के तट पर लगता है। वहीं पूर्ण कुंभ मेला 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है, जो प्रयागराज में होता है। 12 कुंभ मेला पूर्ण होने पर एक महाकुंभ मेले का आयोजन होता है। इससे पहले महाकुंभ प्रयाराज में साल 2013 में आयोजित हुआ था।

13 जनवरी 2025 महाकुम्भ माघ स्नान का शुभारम्भ


पौष पूर्णिमा पर्व का विशेष महत्व शास्त्रों में भी जिक्र किया गया है। इस दिन से महाकुंभ मेले की शुरुआत हो रही है। इस दिन स्नान करना बेहद शुभ माना गया है। महाकुंभ मेले का यह पहला शाही स्नान रहेगा।

14 जनवरी 2025, दिन मंगलवार, मकर संक्राति

‘मकर संक्रान्ति’ भारत के वैदिककालीन पर्वों में से एक है। सूर्य के राशि परिवर्तन कर मकर राशि में प्रवेश का उत्सव मकर संक्रांति है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक, इस दिन स्नान, पुण्य, दान, जप, धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। यह शाही स्नान का दूसरा दिन है।

29 जनवरी 2025, मौनी अमावस्या

मौनी अमावस्या माघ मास की सबसे बड़ा स्नान पर्व है। मौनी अमावस्या का स्नान अन्य सभी स्नानों में सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन पुण्यकाल पर स्वयं का उद्धार और पितरों को तारने के लिए दान, पुण्य, स्नान करने से उत्तम फल मिलता है। यह शाही स्नान का तीसरा दिन है।

03 फरवरी 2025, बसंत पंचमी

बसंत पंचमी को कुंभ स्नान करने और उनके नाम से दान पुण्य करना बहुत अच्छा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान आदि करने से आपकी जीभ पर देवी सरस्वती वास करती हैं। शाही स्नान का यह चौथा दिन है।

12 फरवरी 2025, माघ पूर्णिमा

माघ पूर्णिमा कुंभ मेले का अंतिम और महत्वपूर्ण स्नान तिथि है। इस दिन स्नान ध्यान करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। शाही स्नान का यह पांचवां दिन है।

26 फरवरी 2025, महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि पर महाकुंभ मेले का समापन होगा। इस दिन शिव-पार्वती का ध्यान कर स्नान, ध्यान, पूजन, उपासना, व्रत किया जाता है। ऐसे करने से भोलेनाथ और माता पर्वती की कृपा हमेशा बनी रहती है। यह व्रत करने से आत्मिक शांति मिलती है। यह शही स्नान का छठा और आखिरी दिन है।

Mahakumbh Mela 2025: 12 साल में ही क्यों लगता है महाकुंभ मेला? जानिए कुंभ और महाकुंभ मेले में अंतर

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