अखाड़ों के भीतर अपनी एक अलग दुनिया है। अनूठी परंपराएं, नियम-कायदे हैं। यहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहद तगड़ी होती है। इस सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साधु संत निभाते हैं। पुलिस की तरह यहां कोतवाल की पोस्ट होती है। जिसके पास सुरक्षा की अहम जिम्मेदारी होती है। मामूली गलती पर उसे सजा देने का भी अधिकार रहता है। हर एक अखाड़ा अपने नियम कानून से बंधे होते हैं। कुंभ और महाकुंभ में अखाड़ों का शिविर लगते ही कोतवाली बनाकर कोतवाल नियुक्ति किए जाते हैं। अखाड़े के भीतर आने-जाने वाले संतों और हर व्यक्ति पर कोतवाल की पैनी नजर रहती है। इनकी अनुमति के बिना कोई अखाड़े के शिविर में दाखिल नहीं हो सकता है।
