विमानन कंपनी अकासा एयर (Akasa Air) ने दिल्ली हाई कोर्ट से कुछ पायलटों के बिना पूर्व सूचना दिए नौकरी छोड़कर जाने के मामले में दखल देने की अपील की है। साथ ही अनिवार्य ‘नोटिस पीरियड’ (कंपनी छोड़ने से निर्धारित समय से पहले सूचित करना) संबंधी जरूरतों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का भी आग्रह किया है। अकासा एयर, पायलटों के अचानक से कंपनी छोड़ने से समस्याओं का सामना कर रही है। कंपनी ने कहा है कि उसका यह कदम DGCA या नागर विमानन मंत्रालय के खिलाफ नहीं है। Akasa Air ने अगस्त 2022 में उड़ानें शुरू की थीं।
विमानन कंपनी ने ऐसे कुछ पायलटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है, जिन्होंने नोटिस पीरियड का पालन किए बिना कंपनी छोड़ दी। इस कारण कंपनी को अपनी कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। एयरलाइन ने बयान में कहा कि उसने इन पायलटों के अनैतिक और अवैध कार्य को रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से अपील की है।
विरोध में जाने का नहीं है मामला
अकासा एयर के बयान के अनुसार, “हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) या नागर विमानन मंत्रालय के खिलाफ जाने का मामला नहीं है। यह याचिका, पायलटों के अनिवार्य नोटिस पीरियड जरूरतों से संबंधित ऐसे ही मामले में साल 2018 में इसी अदालत की ओर से जारी अंतरिम आदेश की तत्काल व्याख्या और स्थिति स्पष्ट करने को लेकर है।’’ एयरलाइन के अनुसार, कार्यवाही की शुरुआत के बाद से अदालत में उसकी दलील रही है कि उसका कदम केवल मौजूदा अंतरिम आदेश और सिविल एविएशन रेगुलेशन को लागू करने के लिए स्पष्टीकरण और निर्देश देने के अनुरोध को लेकर है। बयान में कहा गया है कि अकासा एयर, DGCA और नागर विमानन मंत्रालय की पारदर्शी और प्रगतिशील नीतियों और नियमों का प्रत्यक्ष लाभार्थी रहा है।
जुलाई और सितंबर 2023 के बीच उड़ानें हुईं बाधित
एयरलाइन के अनुसार, कुछ पायलटों ने अपनी ड्यूटी छोड़ दी और अपने अनिवार्य कॉन्ट्रैक्चुअल नोटिस पीरियड को पूरा किए बिना कंपनी को छोड़ दिया। इसलिए जुलाई और सितंबर 2023 के बीच उड़ानें बाधित हुईं। एयरलाइन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है और उन पायलटों के खिलाफ रोक लगाने के लिए तत्काल दखल देने को कहा है, जिन्होंने 6 माह का अनिवार्य नोटिस पीरियड पूरा किए बिना अचानक इस्तीफा दे दिया और अपने पद को छोड़ दिया।