बिटकॉइन (Bitcoin) व इथेरियम (Ethereum) जैसी क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Currency) और नॉन-फंजिबल टोकन (NFT) को भारत में कभी भी कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। फाइनेंस सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन (TV Somanathan ) ने बुधवार 2 फरवरी को ये बातें कहीं। सोमनाथन ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स की कीमतों को प्राइवेट तरीके से तय किया जाता है। ऐसे में भारत सरकार की इन पर कोई अथॉरिटी नहीं होगी।
फाइनेंस सेक्रेटरी ने कहा, "बिटकॉइन, एथेरियम या NFT भारत में कभी भी लीगल टेंडर नहीं होंगे। क्रिप्टो एसेट्स ऐसे एसेट्स होते हैं जिनकी कीमत दो लोगों के बीच तय होती है। आप सोना, हीरा, क्रिप्टो खरीद सकते हैं, लेकिन उसके पास सरकार द्वारा मूल्य प्राधिकरण नहीं होगा।"
उन्होंने कहा, "निजी क्रिप्टो में निवेश करने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि इसके पास सरकार का प्राधिकरण नहीं है। आपका निवेश सफल होगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है, नुकसान हो सकता है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है।"
'क्रिप्टो एक तरह की सट्टेबाजी है'
फाइनेंस सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने क्रिप्टो पर टैक्स को लेकर कहा, "क्रिप्टो एक सट्टा लेनदेन है, इसलिए हम इस पर 30% की दर से टैक्स लगा रहे हैं। बिटकॉइन या इथेरियम का वास्तविक मूल्य कोई नहीं जानता। उनकी दर में दैनिक उतार-चढ़ाव होता है। क्रिप्टो के जरिए कमाई करने वालों को अब 30% का भुगतान करना होगा। यह है सरकार की नई नीति।"
उन्होंने कहा, "यह केवल क्रिप्टो के लिए नहीं है, यह सभी सट्टा आय के लिए है। उदाहरण के लिए, यदि मैं घोड़े की रेस से हुई कमाई को लेता हूं, तो उस पर भी 30% टैक्स लगता है। किसी भी सट्टा लेनदेन पर पहले से ही 30% टैक्स है। इसलिए हमने उसी दर से क्रिप्टोकरंसी पर टैक्स लगाने का फैसला किया है।"
'खेती को छोड़कर हर चीज पर टैक्स'
सोमनाथ ने सरकार की टैक्स नीति के बारे में कहा, "सरकार की नीति यह है कि कृषि को छोड़कर बाकी सभी स्रोतों से हासिल होने वाली आय टैक्स के योग्य है। वर्तमान में, हमारे पास क्रिप्टोकरेंसी पर स्पष्टता नहीं है। कई इसे बिजनेस से होने वाली आय के रूप में तो कई कैपिटल गेन के रूप में दिखाते थे। कई लोग अपनी क्रिप्टो संपत्ति घोषित ही नहीं करते थे। हालांकि अब सभी वर्चुअल एसेट्स पर एक समान दर से टैक्स लगाने का फैसला किया गया है और वह टैक्स की दर है 30%।"
'RBI की डिजिटल करेंसी होगी लीगल टेंडर'
सोमनाथन ने कहा, "अगले वित्त वर्ष में जारी होने वाले डिजिटल रुपये को आरबीआई का समर्थन मिलेगा जो कभी भी डिफॉल्ट नहीं होगा। पैसा RBI का होगा लेकिन प्रकृति डिजिटल होगी। RBI द्वारा जारी किया गया डिजिटल रुपया लीगल टेंडर होगा। बाकी सभी लीगल टेंडर नहीं हैं, कभी लीगल टेंडर नहीं बनेंगे।"