BPCL 2027 तक चालू करेगी पहली SAF फैसिलिटी, टेक्नोलॉजी की कर रही जांच-पड़ताल

BPCL वर्तमान में मुंबई, कोच्चि और मध्य प्रदेश के बीना में तीन रिफाइनरियों का संचालन करती है। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी एक नई रिफाइनरी लगाने पर भी काम कर रही है। SAF पहल से सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त करने में मदद मिलने की भी उम्मीद है

अपडेटेड Nov 28, 2024 पर 8:52 AM
BPCL कोच्चि या मुंबई में अपनी मौजूदा रिफाइनरी लोकेशंस पर आगामी SAF उत्पादन फैसिलिटी लगाएगी।

सरकारी कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) 2027 तक कंपनी की पहली सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) फैसिलिटी चालू करने की योजना बना रही है। यह बात मनीकंट्रोल को मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र से पता चली है। कंपनी वर्तमान में SAF उत्पादन के लिए टेक्नोलॉजी का मूल्यांकन कर रही है, जैसे कि ऑयल-टू-जेट या एथेनॉल-टू-जेट। सूत्र ने कहा, "अभी बातचीत शुरुआती दौर में है। हम उत्पादन के लिए टेक्नोलॉजी पर विचार कर रहे हैं।"

BPCL कोच्चि या मुंबई में अपनी मौजूदा रिफाइनरी लोकेशंस पर आगामी SAF उत्पादन फैसिलिटी लगाएगी। इस प्लांट की स्थापना के लिए आवश्यक निवेश और क्षमता को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

ATF में SAF की ब्लेंडिंग से 80% तक घट सकता है एमिशन


SAF या बायो-जेट ईंधन, एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल किया जाने वाला लो कार्बन फ्यूल है। इसे एथेनॉल जैसे नॉन-पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से बनाया जाता है, जिसके चलते पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में कम एमिशन होता है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ SAF की ब्लेंडिंग से ग्रीनहाउस गैस एमिशन को पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

सरकार ने अभी तक SAF मिश्रण के लिए कड़े लक्ष्य निर्धारित नहीं किए हैं, लेकिन 2027 से अनिवार्यताएं लागू होने की उम्मीद है। अनुमान है कि सरकार 2027 से घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF के साथ 1 प्रतिशत SAF मिश्रण को अनिवार्य कर देगी। जेट ईंधन में SAF के 1 प्रतिशत मिश्रण के लिए, भारत को प्रति वर्ष लगभग 14 करोड़ लीटर SAF की जरूरत होगी।

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SAF पहल से सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त करने में मदद मिलने की भी उम्मीद है। इसकी वजह है कि अनुमानित 1 प्रतिशत SAF मिश्रण मैनडेट से फीडस्टॉक के रूप में गन्ना आपूर्ति करने वाले 5 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस कदम से 1 लाख से अधिक ग्रीन जॉब्स क्रिएट होने का भी वादा किया गया है।

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