LIC brand value: भारत की सबसे बड़ी शेयर सेल करने जा रही लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (Life Insurance Corporation) 8.656 अरब डॉलर (लगभग 64,722 करोड़ रुपये) की वैल्युएशन के साथ देश में सबसे मजबूत और सबसे बड़ा ब्रांड है। एक ब्रांड वैल्युएशन (brand valuation) रिपोर्ट के मुताबिक, इसके साथ ही यह दुनिया का तीसरा सबसे मजबूत इंश्योरेंस ब्रांड (insurance brand) भी है।
2022 में 43.40 लाख करोड़ रुपये होगी मार्केट वैल्यू
लंदन की ब्रांड फाइनेंस (Brand Finance) के मुताबिक, एलआईसी (LIC) की मार्केट वैल्यू 2022 तक 43.40 लाख करोड़ रुपये या 59.21 अरब डॉलर और 2027 तक 58.9 लाख करोड़ रुपये या 78.63 अरब डॉलर हो जाएगी।
2021 में भी एलआईसी (LIC) की ब्रांड वैल्यू ग्लोबल ब्रांड रैकिंग में 32 पायदान बढ़कर 206 हो गई थी, जो 2020 में 238वें पायदान पर थी।
देश का सबसे बड़ा ब्रांड है LIC
इस वैल्युएशन के मुताबिक, एलआईसी 2021 में 8.655 अरब डॉलर की वैल्युएशन के साथ देश का सबसे बड़ा और सबसे मजबूत ब्रांड है, जो 2020 की 8.11 अरब डॉलर से 6.8 फीसदी ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि बीते साल जहां एलआईसी की वैल्युएशन में बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं वैश्विक स्तर पर शीर्ष 100 इंश्योरेंस कंपनियों की वैल्यू में 6 फीसदी घटकर 433.0 अरब डॉलर रह गई, जो 2020 में 462.4 अरब डॉलर थी।
ब्रांड स्ट्रेंथ में भी टॉप पर है LIC
नवंबर, 2021 में तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, एलआईसी 84.1 के स्कोर के साथ अपनी कॉम्पिटीटर कंपनियों की तुलना में ब्रांड स्ट्रेंथ के मामले में पहले पायदान पर और वैश्विक स्तर पर ब्रांड स्ट्रेंथ में तीसरे पायदान पर है। उससे आगे इटली की पोस्टे इटैलियाने (Poste Italiane) और स्पेन की मैपफ्रे (Mapfre) हैं। साथ ही वैश्विक स्तर पर 10वां सबसे ज्यादा वैल्युएबल इंश्योरेंस ब्रांड है।
दुनिया में टॉप 10 इंश्योरेंस कंपनियों में में अकेली भारतीय
टॉप 10 में 5 चीन की इंश्योरेंस कंपनियां है, जिसमें पिंग दुनिया का सबसे ज्यादा वैल्युएबल इंश्योरेंस ब्रांड है। हालांकि बीते साल इसकी ब्रांड वैल्यू में 26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। टॉप 10 में अमेरिका की दो कंपनियां हैं, जबकि फ्रांस, जर्मनी और भारत की एक-एक कंपनी शामिल हैं।
इस वैल्युएशन पर 2021 में एलआईसी (LIC) की मार्केट कैप 51.2 अरब डॉलर है, जो 2020 की 53.71 अरब डॉलर से मामूली कम है। रुपये में बात करें तो 2021 में इसकी मार्केट कैप 1.2 फीसदी घटकर 37.5 लाख करोड़ रुपये रह गई, जो 2020 में 38.2 लाख करोड़ रुपये थी।