RBI action against RBL Bank : 78 साल पुराने मुंबई के आरबीएल बैंक के लिए क्रिसमिस डे असामान्य रूप से खासा व्यस्त रहा, हालांकि उसके लिए खुशी की कोई बात नहीं थी। इस दिन बैंक से जुड़े दो अहम घटनाक्रम देखने को मिले।

RBI action against RBL Bank : 78 साल पुराने मुंबई के आरबीएल बैंक के लिए क्रिसमिस डे असामान्य रूप से खासा व्यस्त रहा, हालांकि उसके लिए खुशी की कोई बात नहीं थी। इस दिन बैंक से जुड़े दो अहम घटनाक्रम देखने को मिले।
पहला, रिजर्व बैंक (RBI) ने डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिकेशन के इंचार्ज चीफ जनरल मैनेजर योगेश दयाल को बैंक के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त कर दिया। इसी दिन, बाद में बैंक ने एक्सचेंजेस को सूचित किया कि आरबीएल बैंक के लॉन्ग टर्म एमडी और सीईओ विश्ववीर आहूजा तत्काल छुट्टी पर चले गए हैं।
इसके बाद एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव आहूजा को एमडी व सीईओ नामित किया गया, जिसके लिए रेग्युलेटरी अप्रूवल लेनी होंगी।
इन दो कदमों की क्या वजह हो सकती हैं? बैंक और रेग्युलेटर दोनों ने इसकी कोई वजह नहीं बताई हैं। लेकिन, इसके जवाब के लिए इन कदमों का मतलब समझना चाहिए।
फाइनेंसियल प्रदर्शन या गवर्नेंस की समस्या पर उठते हैं ऐसे कदम
भले ही, हमें इसका कोई ठोस कारण पता नहीं है लेकिन दूसरे बैंकों से मिले अनुभव बताते हैं कि इन बदलावों की वजह सिर्फ भरोसा नहीं हो सकती। आम तौर पर रेग्युलेटर बोर्ड में अपने लोगों को तब बिठाता है, जब उसे फाइनेंसियल प्रदर्शन या गवर्नेंस के मुद्दों या दोनों के लिहाज से बारीकी से जांच की जरूरत महसूस होती है।
निश्चित रूप से हमें नहीं मालूम कि आरबीएल बैंक में क्या हुआ, लेकिन इंडस्ट्री के जानकार लोग संकेत देते हैं कि आरबीआई के कदम और सीईओ को छुट्टी पर भेजने या जाने की दो वजह हो सकती हैं।
एक पुराने बैंकर ने कहा, “या तो रेग्युलेटर को लगा कि बैंक नियमों के तहत डिसक्लोजर नहीं कर रहा था या व्यक्तिगत ईमानदारी का मुद्दा हो सकता है- यानी बार-बार कुछ गलत किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि हम नहीं जानते कि कौन सी बात सही है।”
आरबीआई ने इसी साल बढ़ाया आहूजा का कार्यकाल
याद कीजिए, इस साल की शुरुआत में आरबीएल ने आरबीआई से आहूजा को फिर से बैंक की कमान तीन साल के लिए सौंपने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, रेग्युलेटर ने आरबीएल को उनका कार्यकाल बढ़ाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन यह 30 जून, 2021 से एक साल के लिए दी गई थी।
आरबीएल से पहले, आहूजा 2001 से 2009 तक भारत में बैंक ऑफ अमेरिका के एमडी और सीईओ रहे थे। इससे लगता है कि आरबीआई सतर्क रहा है।
बैंक की रेटिंग की होगी समीक्षा
एक रेटिंग एजेंसी के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए बैंक की रेटिंग की समीक्षा करने की जरूरत होगी। नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर उन्होंने कहा, “रेटिंग और आउटलुक के लिहाज से हमारा रुख स्टेबिल था। लेकिन अब हम इसका रिव्यू करेंगे।”
क्या असेट क्वालिटी की चिंता है? इस पर बैंकर ने कहा, “ऐसा संभव है।” भारी प्रोविजंस के चलते दूसरी तिमाही का आरबीएल बैंक का प्रॉफिट खासा प्रभावित हुआ था। दूसरी तिमाही में ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) और नेट एनपीए रेश्यो दोनों में खासा झटका लगा था। हालांकि, बैंकर ने तर्क दिया, “सिर्फ एनपीए बढ़ने से आरबीआई के इस तरह से अलर्ट होने की संभावना कम है।”
एक एनालिस्ट ने कहा, “आरबीआई सामान्य रूप से ऐसे मामलों में धीरे-धीरे कदम उठाता है, जिससे रिटेल इनवेस्टर्स की चिंता न बढ़े। मैं आगे ऐसे कई घटनाक्रमों की उम्मीद करता हूं।” आरबीआई ने पूर्व में भी बैंकों के बोर्ड में अपने लोग बिठाए हैं। धनलक्ष्मी बैंक और यस बैंक के मामलों में ऐसा हुआ था। इन सभी मामलों में समान बात गवर्नेंस की चिंता और कमजोर फाइनेंसेस थे।
आरबीएल बैंक ने एक्सचेंज को क्या बताया
इनवेस्टर्स को शांत करने के लिए, आरबीएल बैंक ने एक्सचेंजेस को बताया कि बैंक का कामकाज पहले की तरह सामान्य है। आरबीएल ने कहा कि उसका बिजनेस और फाइनेंसियल में लगातार सुधार का ट्रेंड है।
उधर, ट्रेड यूनियंस का रुख सतर्क है। आल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजे एक पत्र में कहा, “हम आरबीएल बैंक के मामले में हो रहे घटनाक्रमों को लेकर चिंतित हैं। हाल के घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि बैंक के साथ सब कुछ सही नहीं है।”
हालांकि, हाल के घटनाक्रमों का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी है। ज्यादा स्पष्टता के लिए इंतजार करने की जरूरत है। लेकिन संभावना है कि आने वाले दिनों में बैंक से जुड़े कई घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
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