ब्रिटिश बैंक Lloyds का एक फैसला और 2500 नौकरियां आ गईं खतरे में, क्या भारत में भी गिरेगी गाज?

लॉयड्स, एनालिस्ट्स और प्रोडक्ट मैनेजर्स सहित कई भूमिकाओं वाले कर्मचारियों के साथ कंसल्टेशन शुरू करने वाला है। बैंक के कई लोगों को सिलेक्शन प्रोसेस से गुजरना होगा और यह स्पष्ट नहीं है कि आखिरकार कितने लोगों की छंटनी की जाएगी। संभावित कटौती के बारे में विस्तार से बताए बिना बैंक इस बात की समीक्षा कर रहा है कि टीमें कैसे काम करती हैं

अपडेटेड Nov 25, 2023 पर 1:36 PM
यह स्पष्ट नहीं है कि आखिरकार कितने लोगों की छंटनी की जाएगी।

ब्रिटेन के सबसे बड़े हाई स्ट्रीट बैंक लॉयड्स (Lloyds) ने लेंडर्स की ओर से लागत कम करने के दबाव के बीच कुछ बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इससे लगभग 2500 नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से कहा गया है कि लॉयड्स, एनालिस्ट्स और प्रोडक्ट मैनेजर्स सहित कई भूमिकाओं वाले कर्मचारियों के साथ कंसल्टेशन शुरू करने वाला है। बैंक के कई लोगों को सिलेक्शन प्रोसेस से गुजरना होगा और यह स्पष्ट नहीं है कि आखिरकार कितने लोगों की छंटनी की जाएगी।

रॉयटर्स के सोर्सेज का कहना है कि कर्मचारियों को अगले सप्ताह इस प्रोसेस के बारे में बताए जाने की उम्मीद है। प्रोसेस में 120 रोल्स का क्रिएशन भी शामिल होगा। लॉयड्स के एक प्रवक्ता ने कहा है, "हम अपने कारोबार को विकसित और ट्रांसफॉर्म कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम अपने ग्राहकों के लिए और अधिक कर सकें और उन्हें जरूरत के प्रोडक्ट और सर्विसेज दे सकें।" आगे कहा कि संभावित कटौती के बारे में विस्तार से बताए बिना बैंक इस बात की समीक्षा कर रहा है कि टीमें कैसे काम करती हैं।

Barclays में भी होने वाली है छंटनी


इससे पहले खबर आई थी कि ब्रिटिश बैंक बार्कलेज (Barclays) में 2000 से अधिक लोगों की नौकरी जा सकती है। दरअसल बैंक लगभग 1.25 अरब डॉलर बचाने की योजना पर काम कर रहा है। इसी के हिस्से के रूप में कर्मचारियों की छंटनी की जा सकती है। नौकरियां मुख्य रूप से बार्कलेज के ऑफिस में जा सकती हैं।

Barclays में जा सकती हैं 2000 से ज्यादा जॉब्स, चल रही कॉस्ट कटिंग की तैयारी

निवेशकों की चिंताएं डाल रहीं असर

रॉयटर्स के मुताबिक, अधिकांश ब्रिटिश बैंकों ने अच्छे मुनाफे की सूचना दी है क्योंकि ऊंची दरों से लेंडिंग रेवेन्यू ​में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन जीवन यापन की लागत के संकट के बीच बचतकर्ताओं की नकदी के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा और संभावित लोन डिफॉल्ट्स को लेकर निवेशकों की चिंताएं इस क्षेत्र पर असर डाल रही हैं।

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