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बजट से क्या हैं लोगों की उम्मीदें

आम आदमी 2 बड़ी मुश्किलों से जूझ रहा है - महंगाई और नौकरी की अनिश्चितता

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 09, 2014 पर 7:00 PM
बजट से क्या हैं लोगों की उम्मीदें

पीवी सुब्रह्मण्यम, फाइनेंशियल ट्रेनर, सुब्रमनी डॉटकॉम

क्या लोगों को वास्तव में बजट से भारी अपेक्षाएं हैं ये कहना थोड़ा मुश्किल है। नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली ने कई बार उन कड़े कदमों के बारे में बताया है जिनकी अर्थव्यवस्था को जरूरत है। मेरा मानना है कि हम एक कड़े बजट के लिए ज्यादा तैयार नहीं हैं। हालांकि आम आदमी 2 बड़ी मुश्किलों से जूझ रहा है। महंगाई और नौकरी की अनिश्चितता। असंगठित सेक्टर और निजी सेक्टर इस अनिश्चितता से ज्यादा परेशान हुए हैं जिसके पीछे वजह है उनकी ईएमआई, बच्चों की शिक्षा और अपना रिटायरमेंट।

हालांकि अपने कई पाठक और निवेशकों से बात करके जो मैंने जाना है यहां उसके बारे में कुछ बताना चाहता हूं। मैं आपको निश्चिंत करना चाहता हूं कि ये किसी दर्शकों से सर्वे करके जाना नहीं गया है। ये सिर्फ कुछ लोगों से बात करके जानने समझने की कोशिश की गई है। उनमें से कई ने नमो के लिए वोट किया होगा और शायद इसीलिए उनकी अपेक्षाएं ज्यादा हैं।

- आईटी सीमा का सूचीकरणः लगभग 50 साल पहले आईटी सीमा का काफी महत्व होता था हालांकि ये महंगाई की तुलना में उतनी नहीं बढ़ी। जरूरी नहीं कि हरेक वित्त मंत्री आकर इन्कम टैक्स की सीमा इस तरह बढ़ाए जैसे वो कोई अहसान कर रहा है। अगर एसेसमेंट साल 2013-2014 में आईटी सीमा 2 लाख रुपये है तो वित्त वर्ष 2014-1015 में यए अपने आप बढ़कर 2.10 लाख रुपये हो जानी चाहिए क्योंकि महंगाई 10 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़ रही है। ये समझने और लागू करने में आसान है। हम ऐसा कैपिटल गेन्स के मामले में कर चुके हैं तो ये कॉन्सेप्ट नया नहीं है। 

- सरकार को 70 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए इन्कम टैक्स रिटर्न भरना स्वैच्छिक कर देना चाहिए। और अगर उनकी आय 15 लाख रुपये से कम हो तो उनको टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।

- सरकार को महंगाई को एक बड़ा कारक मानना चाहिए खासकर उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो सिर्फ बैंक के ब्याज पर अपना जीवनयापन कर रहे हैं। उन्हें सीमित रिटर्न मिल रहा है और उसमें से बड़ा भाग टीडीएस में चला जाता है।

- टैक्स का कटना, इसका पेमेंट और क्रेडिट डिपॉजिटर के लिए आसान होना चाहिए।

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