सरकार की कुल आमदनी और खुल खर्च के संतुलन यानी राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Descipline) को बनाए रखने के लिए आम बजय यानी यूनियन बजट की कवायद बेहद महत्वपूर्ण होती है। आम बजट में वित्त मंत्री देश के कुल खर्च, कुल राजस्व, घाटा और ऋण सहित सरकार के वित्त (Finance) का व्यापक विवरण प्रस्तुत करते हैं। सामान्य भाषा में कहें तो बजट सरकार के खर्च और कमाई का लेखा-जोखा होता है। जिस तरह आप हर महीने अपने घर के लिए बजट बनाते हैं कि कितनी आमदनी होगी, कितने पैसे खर्च होंगे और अंत में कितनी बचत होगी? ठीक उसी तरह केंद्र और राज्य की सरकारें भी देश और राज्य की आमदनी और खर्च का हिसाब-किताब रखने के लिए बजट बनाते हैं।
आम बजट को कई श्रेणियों में बांटा जाता है। लेकिन मुख्यतः यह 3 तरह का होता है। संतुलित बजट (Balanced Budget), सरप्लस बजट (Surplus Budget) और डेफिसिट बजट (Deficit Budget), ये बजट के तीम प्रकार हैं। लेकिन इसे हम और कई श्रेणियों में बांट सकते हैं जैसे अंतरिम बजट (Interim Budget) और पूर्ण बजट (Full Budget) में भी इसे विभाजित कर सकते हैं। इसके अलावा भी बजट को कई श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं। आज जानते हैं क्या होता है संतुलित बजट, सरप्लस बजट और डेफिसिट बजट…
क्या होता है संतुलित बजट
जब किसी एक वित्त वर्ष में सरकार की कुल अनुमानित आमदनी और कुल अनुमानित खर्च के आंकड़े बराबर होते हैं तो उसे संतुलित या बैलेंस्ड बजट कहते हैं। अधिकतर अर्थशास्त्री सरकार से इसी तरह के बजट की उम्मीद करते हैं। इस बजट को वास्तव में उपलब्ध संसाधनों में जीने वाला बजट भी कहा जाता है। यानी आपकी चादर जितनी हो पैर उतना ही फैलाएं। इस तरह के लोग ये उमम्द करते हैं कि सरकार का खर्च उसके प्राप्त रेवेन्यू से अधिक नहीं होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि सरकार अपनी आमदनी के हिसाब से ही रकम खर्च करेगी। इस तरह के बजट से इकोनॉमिक स्टेबिलिटी बनी रहती है। लेकिन इस तरह का बजट आर्थिक मंदी के समय में कारगर साबित नहीं होता है। इससे बेरोजगारी और इकोनॉमिक ग्रोथ की समस्या नहीं सुलझ पाती है। साथ ही कल्याणकारी योजनाओं पर सरकार अधिक खर्च नहीं कर पाती है।
सरप्लस बजट के मायने
किसी एक वित्त वर्ष में अगर सरकार की आमदनी उसके खर्च से अधिक होती है तो उसे सरप्लस बजट कहते हैं। इसका मतलब यह होता है कि सरकार को टैक्स और इंटरेस्ट आदि से जितनी राशि प्राप्त होती है, सरकार लोगों पर उससे कम खर्च करती है। यानी सरकार जनकल्याण के काम पर जितनी रकम खर्च करेगी, उससे अधिक रकम टैक्स से जुटा लेगी। इस तरह का बजट महंगाई नियंत्रित करने के लिए बनाया जाता है और इससे प्रोडक्ट्स के डिमांड को घटाने में मदद मिलती है। सरप्लस बजट देश की आर्थक संपन्नता को दर्शाता है।
डेफिसिट बजट क्या है?
अगर सरकार का अनुमानित खर्च उसकी कमाई से अधिक रहता है तो इसे डेफिसिट बजट कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि सरकार की टैक्स और अन्य स्रोतों से जितनी आमदनी होगी, सरकार कल्याणकारी योजनाओं पर उससे अधिक खर्च करने की योजना बना रही है। भारत जैसे विकासशील देश में इस तरह का बजट ग्रोथ को बढ़ाने में मददगार साबित होता है। खासतौर पर आर्थिक सुस्ती के दौर में इस तरह का बजट काफी लाभदायक हो सकता है। डेफिसिट बजट से मांग बढ़ाने और आर्थिक विकास में तेजी लाने में मदद मिलती है। लेकिन इसमें सरकार वित्तीय संस्थाओं और वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ जैसे वैश्विक संगठनों के उधार लेकर अपने खर्च को पूरा करती है। लेकिन इसका नुकसान यह है कि उधारी की वजह से सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
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