Budget 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन 23 जुलाई, 2024 को बजट पेश करेंगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन इस महीने 23 जुलाई को अपना लगातार सातवां बजट पेश करेंगी। जिसको लेकर तैयारियां की जा रही हैं। देश के हर एक राज्य और इंडस्ट्री से जुड़े लोग बजट से अपनी डिमांड के बारे में बात कर रहे हैं। बिहार के कारोबारियों ने भी अपनी मांगें रखी हैं।
Budget 2024 : बिहार की मिठाई इंडस्ट्री की बजट से मांग
बिहार के गया में मिठाई बनाने के उद्योग से करीब 10,000 लोग जुड़े हैं। केंद्रीय बजट 2024 आने में कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में मिठाई बनाने वाले जीएसटी कम करने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि मिठाइयों पर टैक्स में कटौती करने से उनका व्यवसाय बढ़ेगा। लोग खाने की चीजों पर जीएसटी घटाने के अलावा सरकार से महंगाई कम करने की भी मांग कर रहे हैं। गया पारंपरिक भारतीय मिठाइयों जैसे तिलकुट और अनरसा के प्रमुख उत्पादक के रूप में मशहूर है। तिलकुट, तिल और गुड़ से बनाया जाता है। वहीं अनरसा भीगे हुए चावल और गुड़ या चीनी का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है। इन मिठाइयों का इस्तेमाल न केवल त्योहारों के दौरान, बल्कि इन्हें मंदिरों में प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है।
बजट 2024: बिहार के कैमूर जिले के राइस मिल मालिकों की खरीद रेट बढ़ाने की अपील
बिहार के कैमूर जिले के राइस मिल मालिक भी इस बजट से काफी उम्मीदें लगाए हुए हैं। उनकी मांग है कि सरकार चावल खरीद के रेट को बढ़ाएगी। भारत सरकार का जो मिलिंग है अभी आज भी अरवा पर 10 रुपया और उसना पर 20 रुपया जो मिलिंग चार्ज है ये कहीं से अच्छी बात नहीं है इतना खर्च में कहीं चावल बन नहीं सकता है। कारोबारियों के मुताबिक कम से कम उसना में 200 रुपया मिलिंग चार्ज होना चाहिए और अरवा में कम से कम 150 रुपया मिलिंग चार्ज होना चाहिए। मिलिंग जो आज से 10-15 साल पहले 10 रुपया था अरवा मिलर का, 20 रुपया उसना मिलर का व आज भी मिल रहा है जबकि बिजली कॉस्ट, लेबर कॉस्ट सब में दस गुना बढ़ोत्तरी हो गया है लेकिन अभी 10 रुपया ही 10 रुपया मिलिंग मिलता है अरवा को और 20 रुपया मिलिंग मिलता है उसना मिलर को तो उसमें क्या वो लेबर को दे पाएगा या मिलिंग खर्च उठा पाएगा उसमें। ऐसे में कैमूर जिले के राइस मिल मालिक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन से उनके कारोबार के लिए कुछ फायदेमंद घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं।
बजट 2024: बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और इनवेस्टमेंट पर ध्यान देने की मांग
बिहार उद्योग संघ वित्त मंत्री को राज्य में औद्योगिक विकास के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देने के लिए अपनी डिमांड की लिस्ट की सूची दी है। बिहार उद्योग संघ के अध्यक्ष संजय गोयनका ने कहा कि MSME सेक्टर में हमने जो बेसिक बातें रखी थी कि 100 पिछड़े जिल अगर सरकार पैन इंडिया पहचान कर लेती है, तो 10-12 जिले तो बिहार में आएंगे। वहां पर जब इनकम टैक्स का फायदा मिलेगा, तो अपने आप इंडस्ट्रीलाइजेशन का प्रोसेस आ जाएगा। और ऐसा एक्सपेरिमेंट हिंदुस्तान में 1994 में सरकार कर चुकी है। वो 10 साल तक चला था। वो पॉलिसी फिर हटा ली गई थी।
बिहार उद्योग संघ के उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने कहा कि बिहार में दो इंडस्ट्री सबसे ज्यादा चल सकती है। एक है जो सर्विस इंडस्ट्री, जिसमें टूरिज्म आता है और दूसरा एग्रीकल्चर बेस्ड इंडस्ट्री। कारोबारी चाहते हैं कि बिहार का टूरिज्म सेक्टर के लिए स्पेशल प्रोविजन हो। अगर हम मार्केटिंग ढंग से करे और इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक हो जाए। ते यो इंडस्ट्री डेवलप हो सकती है।