GST Collection: दिसंबर में 6.1% बढ़ा GST कलेक्शन, सरकार के खजाने में आए ₹1.74 लाख करोड़

GST Collection: दिसंबर 2025 में GST कलेक्शन 6.1% बढ़कर ₹1.74 लाख करोड़ पहुंच गया। रिफंड में भी तेज उछाल दिखा। अप्रैल से दिसंबर की अवधि में कुल GST कलेक्शन 8.6% बढ़ा, जो अर्थव्यवस्था की स्थिर गतिविधि को दिखाता है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 01, 2026 पर 3:37 PM
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वित्त वर्ष 2025–26 की अप्रैल से दिसंबर अवधि में कुल ग्रॉस GST कलेक्शन ₹16.50 लाख करोड़ रहा।

GST Collection: दिसंबर 2025 में देश का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत बढ़कर ₹1,74,550 करोड़ हो गया। दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा ₹1,64,556 करोड़ था। ये जानकारी 1 जनवरी 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों में सामने आई है।

GST रिफंड के मोर्चे पर भी मजबूत बढ़त देखने को मिली। दिसंबर 2025 में रिफंड सालाना आधार पर 30.9 प्रतिशत बढ़कर ₹28,980 करोड़ रहा। इससे साफ है कि रिफंड प्रोसेसिंग में तेजी आई है।

घरेलू GST में मामूली बढ़त


आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में घरेलू लेनदेन से मिलने वाला ग्रॉस GST राजस्व 1.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1.22 लाख करोड़ रहा। वहीं आयात से मिलने वाला टैक्स 19.7 प्रतिशत की तेज बढ़त के साथ ₹51,977 करोड़ तक पहुंच गया।

रिफंड के बाद दिसंबर 2025 में नेट GST कलेक्शन ₹1.45 लाख करोड़ रहा। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 2.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है।

अप्रैल-दिसंबर में कलेक्शन 8.6% बढ़ा

वित्त वर्ष 2025–26 की अप्रैल से दिसंबर अवधि में कुल ग्रॉस GST कलेक्शन ₹16.50 लाख करोड़ रहा। यह पिछले साल की समान अवधि में जुटाए गए ₹15.19 लाख करोड़ के मुकाबले 8.6 प्रतिशत ज्यादा है।

GST कलेक्शन क्या है

GST कलेक्शन वह कुल टैक्स रकम होती है, जो केंद्र और राज्य सरकारें वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के जरिए वसूलती हैं। जब कोई ग्राहक कोई सामान खरीदता है या सेवा लेता है, तो उसकी कीमत में GST जुड़ा होता है।

यही टैक्स आगे चलकर सरकार के पास जमा होता है। GST का मकसद देश में एक समान टैक्स सिस्टम बनाना और अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों को एक ढांचे में लाना है।

GST का बंटवारा कैसे होता है

GST दो हिस्सों में बंटा होता है। राज्य के अंदर लेनदेन पर CGST (केंद्र का हिस्सा) और SGST (राज्य का हिस्सा) लगता है, जिसे केंद्र और राज्य आपस में बांट लेते हैं।

वहीं, जब एक राज्य से दूसरे राज्य में कारोबार होता है, तो IGST लगाया जाता है। बाद में केंद्र IGST का हिस्सा संबंधित राज्यों को ट्रांसफर करता है, ताकि टैक्स उसी राज्य को मिले जहां खपत हुई है।

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