वर्ष 2014 में जबरदस्त बहुमत के साथ सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार का यह 7वां फुल बजट है। सत्ता संभालते ही पीएम मोदी ने बड़े इकोनॉमिक रिफॉर्म्स की घोषणा की थी, इनकम टैक्स रिफॉर्म भी शामिल थी। पिछले 6 बजट में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई बड़ी घोषनाएं की हैं, जिनमें इनकम टैक्स में कई तरह की छूट शामिल हैं। इस साल के बजट से भी लोगों को इनकम टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद है। लोगों को यह उम्मीद है कि सरकार इस साल भी टैक्स स्लैब में बदलाव कर सकती है और टैक्स छूट का दायरा बढ़ा सकती है। आइए जानते हैं मोदी सरकार ने अपने 7 साल के कार्यकाल में अब तक इनकम टैक्स के मोर्चे पर कौन से बड़े बदलाव किए हैं।

2014 के बजट में टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष 2014 में वित्त वर्ष 2014-15 के लिए पेश बजट में इनकम टैक्स में छूट की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये कर दिया, वहीं सीनियर सिटीजंस के लिए टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपये की। होम लोन पर चुकाये जाने वाले ब्याज में इनकम टैक्स डिडजक्शन की लिमिट को 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया। वहीं, इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली टैक्स छूट को 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख कर दिया।

2015 में वेल्थ टैक्स हटाया

मोदी सरकार ने 2015 के बजट मे वेल्थ टैक्स को खत्म कर दिया और उसके सुपर रीच (Super Rich), जिनका टैक्सेबल इनकम 1 करोड़ रुपये से अधिक है, उनपर 2% सरचार्ज लगा दिया और सरचार्ज को 10% से बढ़ाकर 12% कर दिया। NPS स्कीम के तहत 50,000 रुपये के एडिशनल डिडक्शन की घोषणा की गई। हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर मिलने वाली छूट को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया।

2016 में रेंट पर रहने वालों को मिली सौगात

वर्ष 2016 में पेश आम बजट में मोदी सरकार ने 5 लाख रुपये से कम आमदनी वाले रेंट पर रहने वालों को सौगात देते हुए इनकम टैक्स के सेक्शन 80GG के तहत टैक्स छूट की सीमा को 24 हजार से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया गया। Super Rich जिनका टैक्सेबल इनकम 1 करोड़ रुपये से अधिक था, उनपर सरचार्ज को 12% से बढ़ाकर 15% कर दिया। इसके अलावा जिन लोगों तो डिविडेंड के रूप में सालाना 10 लाख रुपये से अधिक मिलते हैं, उन पर 10% आईटी टैक्स लगाया गया।

2017 में टैक्स स्लैब में किया बदलाव

वर्ष 2016 में पेश आम बजट में मोदी सरकार ने इनकम टैक्स में बदलाव करते हुए सालाना 3.5 लाख रुपये आमदनी वाले लोगों के लिए टैक्स रीबेट से घटाकर 5000 रुपये से 2500 रुपये कर दिया। वहीं, 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये आमदनी वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स रेट के 10% से घटाकर 5% कर दिया। वहीं, 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये सालाना आमदनी वाले लोगों के लिए 10% सरचार्ज लगाया गया।

2018 में टैक्सपेयर्स को 5800 रुपये का फायदा

मोदी सरकार ने 2018 में पेश बजट में ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल reimbursements में 40,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन इंट्रोड्यूस किया। सीनियर सिटीजंस के लिए मेडिकल खर्च में छूट की सीमा को 30,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया गया। इसके बाद 3% एजुकेशन सेस को 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस से बदल दिया गया।

2019 में 5 लाख के इनकम पर जीरो टैक्स की घोषणा

वर्ष 2019 में पेश अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने इनकम टैक्स की छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक दिया। यानी 5 लाख रुपये तक कमाने वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ा। वहीं, सैलरी क्लास के लिए 2019 में स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 कियी गया।

2020 में नए टैक्स स्लैब की घोषणा

2020 मे नया पर्सनल इनकम टैक्स रेजीम लॉन्च करने की घोषणा बजट में हुई और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम (DDT) को खत्म कर दिया गया। इसके अलावा 15 लाख रुपये तक की आमदनी वाले लोगों के लिए नए टैक्स स्लैब की घोषणा की गई। इसके मुताबिक 5 लाख तक की कमाई वाले लोगों के लिए जीरो टैक्स, 5 से 7.5 लाख पर 10% इनकम टैक्स, 7.5 लाख से 10 लाख पर 15% और 10 से 12.5 लाख तक कमाने वाले लोगों पर 20% टैक्स और 12.5 लाख से 15 लाख की कमाई पर 25% इनकम टैक्स लगाया गया।

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