
Union Budget 2022 : केंद्र सरकार आम बजट, 2022 में पब्लिक सेक्टर के बैंकों (पीएसबी) के आगे कंसॉलिडेशन, कमजोर बैंकों के प्राइवेटाइजेशन पर तस्वीर साफ कर सकती है लेकिन ट्रेड यूनियन की तरफ से हो रहे विरोध के चलते ऐसा आसान नहीं होगा। बैंकिंग इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने यह बात कही है।
आईडीबीआई बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश खातनहर ने कहा, “केंद्र सरकार प्रमुख पब्लिक सेक्टर के बैंकों के कंसॉलिडेशन की दिशा में प्रयास कर सकती है। हालांकि, उसका जोर कमजोर प्रदर्शन करने वाले कुछ पब्लिक सेक्टर के बैंकों के प्राइवेटाइजेशन और पब्लिक सेक्टर के अच्छे बैंकों का कैपिटल बेस बढ़ाने की दिशा में काम करने पर हो सकता है।”
प्राइवेटाइजेशन- एक लंबे समय से लंबित एजेंडा
पीएसबी का प्राइवेटाइजेशन सरकार का लंबे समय से लंबित एजेंडा है। हालांकि, वह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 2019 में 10 सरकारी बैंकों के चार बैंकों में विलय के ऐलान के साथ अभी तक विभिन्न बैंकों के विलय में ही कामयाब रही है।
आम बजट 2021 में, सीतारमण ने कहा था कि इस साल तीन बैंकों का प्राइवेटाइजेशन किया जाएगा। उन्होंने कहा था, “आईडीबीआई बैंक के अलावा, हम 2021-22 में दो पब्लिक सेक्टर के बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्राइवेटिजेशन का प्रस्ताव करते हैं।” लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। खतनाकर ने कहा, सरकार पहले पीएसबी के डिजिटलाइजेशन पर ध्यान केंद्रित कर सकती है, जिससे उन्हें टेक सेवी बैंकों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया जा सके।
मुंबई के एक ब्रोकरेज से जुड़े सीनियर एनालिस्ट ने कहा, “प्राइवेटिजेशन एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील फैसला है। मुझे इस मोर्चे पर कुछ होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, आम बजट प्राइवेटाइजेशन के एजेंडे पर कुछ रोडमैप पेश कर सकता है।”
ट्रेड यूनियनों का विरोध
भारत के बैंक कर्मचारियों की ट्रेड यूनियंस में पीएसबी के प्राइवेटाइजेशन का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने दलील दी कि इस तरह की कवायद से जॉब लॉस की स्थिति पैदा होगी। यूबीएफयू के कन्वेनर बी. रामबाबू ने एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा, “यह हकीकत है कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों का इस्तेमाल ग्लोबल ट्रस्ट बैंक, यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक, बैंक ऑफ कराड आदि प्राइवेट बैंकों को उबारने के लिए किया गया है। हाल में एसबीआई ने यस बैंक को बेल आउट किया। एसबीआई और एलआईसी ने ही आईएलएंडएफएस को उबारा।”
ट्रेड यूनियन ने आरोप लगाया कि 13 कॉरपोरेट्स को लोन देने से पीएसबी को 2.85 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, साथ ही यस बैंक और आईएलएंडएफएस जैसे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस उबारने के लिए पीएसबी को इस्तेमाल किया गया।
बजट में इन क्षेत्रों पर दिया जा सकता है जोर
खातनहर ने कहा, बजट में सरकार के मुख्य जोर वाले क्षेत्रों में पहले से सुधर रही क्रेडिट ग्रोथ में और सुधार व एसेट क्वालिटी को बनाए रखना है।
खातनहर ने कहा, “हम हाउसिंग सेक्टर को कुछ रियायत देने के साथ ही जॉब्स पैदा करने पर ध्यान देने की उम्मीद करते हैं। इसी प्रकार, इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, डिजिटलाइजेशन और घरेलू डिमांड को बढ़ावा देने पर जोर देने की संभावना है।”
आरबीआई के डाटा के मुताबिक, अक्टूबर, 2021 में इंडस्ट्री की क्रेडिट ग्रोथ 4.1 फीसदी रही है, जबकि अक्टूबर, 2020 में 0.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। साइज के आधार पर देखें तो मीडियम इंडस्ट्रीज ने अक्टूबर, 2021 में 48.6 फीसदी की मजबूत ग्रोथ दर्ज की, जबकि बीते साल यह 20.8 फीसदी रही थी। इस अवधि में माइक्रो एंड स्माल इंडस्ट्रीज की क्रेडिट ग्रोथ 0.7 फीसदी से बढ़कर 11.9 फीसदी हो गई। वहीं बड़ी इंडस्ट्रीज की क्रेडिट ग्रोथ अक्टूबर, 2021 में 0.5 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले समान महीने में 1.8 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
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