Budget 2022 : सरकार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के भारत को गैस बेस्ड इकोनॉमी बनाने के विजन को साकार करने और देश की एनर्जी बास्केट में पर्यावरण अनुकूल ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नैचुरल गैस को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (Goods and Services Tax) के दायरे में लाया जाना चाहिए। एक इंडस्ट्री बॉडी ने बुधवार को यह डिमांड की, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ-साथ सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है।
नेचुरल गैस फिलहाल जीएसटी के दायरे से बाहर है और इस पर अभी भी सेंट्रल एक्साइस ड्यूटी, स्टेट वैट, सेंट्रल सेल्स टैक्स लागू हैं।
FIPI ने भेजा वित्त मंत्रालय को प्री बजट मेमोरैंडम
फेडरेशन ऑफ इंडिया पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज (एफआईपीआई) ने वित्त मंत्रालय को भेजे अपने प्री-बजट मेमोरैंडम में पाइपलाइन के जरिये नैचुरल गैस के ट्रांसपोर्टेशन के साथ ही इंपोर्टेड एलएनजी (LNG) के रि-गैसिफिकेशन पर लगने वाले जीएसटी को व्यवस्थित करने की भी मांग की, जिससे पर्यावरण अनुकूल फ्यूल की कॉस्ट को कम किया जा सके। एफआईपीआई में सदस्य के रूप में तेल एवं गैस क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं।
एनर्जी बास्केट में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी 15% करने का है लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने 2030 तक देश की प्राइमरी एनर्जी बास्केट में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है, जो फिलहाल 6.2 फीसदी है। नेचुरल गैस के ज्यादा इस्तेमाल से फ्यूल की कॉस्ट कम होने के साथ ही कार्बन इमिशन में कमी आएगी, जिससे देश की सीओपी-26 की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कई राज्य वसूलते हैं ज्यादा वैट
एफआईपीआई ने कहा, 'प्राकृतिक गैस को जीएसटी व्यवस्था में शामिल न होने से गैस प्रोड्यूसर्स और सप्लायर्स को ज्यादा कर चुकाना पड़ता है और नैचुरल गैस की कीमतों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे नैचुरल गैस बेस्ड इंडस्ट्रीज पर भी असर पड़ता है।'
नेचुरल गैस पर कई राज्यों में ज्यादा वैट लगाया जाता है। प्राकृतिक गैस पर आंध्र प्रदेश में 24.5 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 14.5 फीसदी, गुजरात में 15 फीसदी और मध्य प्रदेश में 14 फीसदी वैट है।
गैस एक्सचेंज की स्थापना के लिए यह है पूर्व शर्त
एक समान कर और नेचुरल गैस के देश भर में कर विसंगतियों से मुक्त व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए नेचुरल गैस को जीएसटी में शामिल करना जरूरी है। इंडस्ट्री बॉडी ने कहा, “यह देश में गैस एक्सचेंज के विकास के लिए पूर्व निर्धारित शर्तों में से एक है।”
एफआईपीआई ने कहा कि जीएसटी रेजीम में क्रूड ऑयल, नैचुरल गैस, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ जैसे बेसिक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को शामिल नहीं करने से सेक्टर पर विपरीत असर पड़ रहा है।
डिसक्लेमर : रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट की एक मात्र बेनीफिशियरी है, जो नेटवर्क18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट्स लि. को नियंत्रित करती है।