Budget 2022 : पहले से संकट में फंसी रिटेल इंडस्ट्री (retail industry) को कोविड महामारी (Covid pandemic) की तीसरी लहर के बीच चुनौतीपूर्ण दौर से निपटने के लिए इस बजट में राहत उपायों के जरिये मदद मिलने की उम्मीद है। इंडस्ट्री पिछले एक अरसे से फुटफाल में कमी और सेल्स में गिरावट से जूझना पड़ रहा है। इसके अलावा इंडस्ट्री आम बजट (union budget) में नेशनल रिटेल पॉलिसी (National Retail Policy), जीएसटी की रिस्ट्रक्चरिंग और कंजम्प्शन को प्रोत्साहन देने की पहलों का ऐलान होने की उम्मीद कर रही है।
गरीबों की स्पेंडिंग पावर बढ़ाने की योजना पेश हो
रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा, “महामारी के दो साल में आबादी के कमजोर तबकों पर खासा असर पड़ा है। रिवर्स माइग्रेशन और लॉकडाउन के चलते कई बेरोजगार हैं। गरीबों की स्पेंडिंग पावर बढ़ाने में मदद करने वाली किसी भी योजना का स्वागत होगा।”
सैलरी क्लास के हाथों में हो ज्यादा पैसा
उन्होंने कहा, आत्मविश्वास के साथ खपत में मदद करने के लिए सैलरीज क्लास आबादी के हाथों में ज्यादा पैसा सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “बढ़ती महंगाई एक बड़ी चिंता है और इसका सामना कंज्यूमिंग क्लास के हाथों में ज्यादा पैसा सुनिश्चित करके ही किया जा सकता है।”
रिटेल सेक्टर में कारोबार कर रही कंपनियां जीएसटी से कुछ सुधारों की भी मांग कर रही हैं। कैंटाबिल रिटेल इंडिया के सीएफओ शिवेंद्र निगम ने कहा, “हमें उम्मीद है कि वित्त मंत्री जीएसटी की औपचारिकताओं में बदलाव पर विचार करेंगी, जिसमें क्वार्टरली फाइलर्स द्वारा रिटर्न की क्वार्टरली फाइलिंग के चलते मंथली फाइलर्स द्वारा इनपुट क्रेडिट हासिल करने में देरी शामिल है।”
राजगोपालन को लगता है कि सरकार को जीएसटी कार्यान्वयन के लिहाज से इंडस्ट्री को एक बेहदर दिशा देने की जरूरत है।
माल ओनर्स कर्ज के लिए मोरेटोरियम की मांग कर रहे हैं। ठाणे के विवियाना मॉल के सीईओ गुरविनीत सिंह ने कहा, “पहले लॉकडाउन के दौरान, शॉपिंग माल्स को सात-आठ महीनों की अवधि के लिए कर्ज पर मोरेटोरियम ऑफर किया गया था, लेकिन ज्यादा गंभीर दूसरी वेव के दौरान ऐसी कोई राहत नहीं दी गई। तीसरी वेव से भी रिटेल इंडस्ट्री को झटका लगा है और लोन पर मोरेटोरियम से उन्हें बने रहने में मदद मिलेगी।”