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Budget 2024: पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच कितनी बार कर पाएंगे स्विच, जानें पूरी डिटेल

Budget 2024: बजट 2023 में नए टैक्स सिस्टम को डिफॉल्ट के तौर पर रखा गया है। इसलिए जब तक आप यह खुद से पुरानी टैक्स व्यवस्था को नहीं चुनते तब तक आप नई कर व्यवस्था के तहत ही आएंगे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या पुरानी टैक्स व्यवस्था से नई टैक्स व्यवस्था पर स्विच किया जा सकता है?

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2024 पर 1:02 PM
Budget 2024: पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच कितनी बार कर पाएंगे स्विच, जानें पूरी डिटेल
Budget Income Tax: जानिए नए और पुराने रिजीम में कितनी बार स्विच कर सकते हैं

Budget 2024: इस साल आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट को काफी छोटा रखा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट में डायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया है। फिलहाल नया और पुराना टैक्स रिजीम है। इसमें नए टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपए तक की टैक्सेबल इनकम फ्री है। पिछले साल बजट में वित्त मंत्री ने नए टैक्स रिजीम को ही बाई डिफॉल्ट कर दिया था। यानि अगर आप चुनते नहीं हैं तो अपने आप नया टैक्स रिजीम आप पर लागू होगा। इससे पहले कि आप नया या पुराना टैक्स रिजीम फाइनल करें, ये जान लीजिए कि आप कितनी बार इसमें बदलाव कर सकते हैं।

Income Tax: पुरानी से नई टैक्स व्यवस्था के बीच कर सकते हैं स्विच

बता दें कि हर फाइनेंशियल ईयर में कोई भी व्यक्ति नए टैक्स सिस्टम और पुराने टैक्स सिस्टम के बीच स्विच कर सकता है। हालांकि इसके लिए उसकी इनकम टैक्स के दायरे में आनी चाहिए। हालांकि यह सुविधा केवल नौकरीपेशा लोगों के लिए है। बिजनेस से होने वाली इनकम को इस सुविधा से बाहर रखा गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पुरानी और नई कर व्यवस्था के बीच विकल्प बना हुआ है। लेकिन बजट में प्रस्तावित बदलावों के साथ डिफॉल्ट का विकल्प बदल गया है। बिजनेस करने वाले लोग केवल एक बार ही कर व्यवस्था के बीच स्विच कर सकते हैं।

वेतनभोगी कर्मचारी हर साल कर पाएंगे स्विच

बता दें कि यह बदलाव वित्त वर्ष 2024 से लागू होगा। नौकरीपेशा व्यक्ति टैक्स भरने की तारीख से पहले रिटर्न दाखिल करने के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम के विकल्प को चुन सकते हैं। नौकरीपेशा व्यक्ति हर साल टैक्स रिजीम को स्विच कर पाएंगे, लेकिन बिजनस करने वालों के लिए केवल एक बार ही यह ऑप्शन अवेलबल होगा। इसका मतलब यह होगा कि अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करते समय पुरानी टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनना चाहते हैं तो सुनिश्चित करें कि आईटीआर नियत तारीख को या उससे पहले फाइल किया गया हो। यदि आईटीआर देर से दाखिल किया जाता है, तो आयकर बकाया की गणना के लिए नई कर व्यवस्था का उपयोग किया जाएगा।

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