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Budget 2023: ग्लोबल चैलेंजेज के बावजूद इंडिया को ग्रोथ पर फोकस रखना होगा

Budget 2023: IMF के अनुमान के मुताबिक, हर पांच में से दो इकोनॉमी की जीडीपी में 2022-23 में गिरावट देखने को मिलेगी। 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा वाली तीन इकोनॉमीज पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इनमें रूस, जर्मनी और इटली शामिल हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 09, 2022 पर 12:44 PM
Budget 2023: ग्लोबल चैलेंजेज के बावजूद इंडिया को ग्रोथ पर फोकस रखना होगा
बजट 2023 इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ तेज करने के लिए रास्ते बना सकता है। टैक्स और इंसेंटिव में कमी के अलावा यह इंडियन ब्यूरोक्रेसी की लाल फीताशाही को खत्म कर सकता है।

गौतम चिकरमाने

Budget 2023: हम विदेश में चल रही एक लड़ाई की वजह से इनफ्लेशन (Inflation) का आयात कर रहे हैं, जिससे हमारा कुछ भी लेनादेना नहीं है। दुनिया भर में इंटरेस्ट बढ़ने से विदेशी निवेश (Foreign Investment) के देश से बाहर जाने का खतरा दिख रहा है। 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट डोमेस्टिक पब्लिक फाइनेंस के लिए बहुत कुछ नहीं कर सकता है। लेकिन, यह इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) की ग्रोथ तेज करने के लिए कुछ कर सकता है। इसलिए इस बजट का फोकस ऐसी व्यापक इकोनॉमिक पॉलिसी (Economic Policy) पर होना चाहिए, जिसकी जड़ें और शाखाएं फाइनेंस मिनिस्ट्री के दायरे से बाहर जाती हैं।

इनफ्लेशन और इसके चैलेंजेज

इंडिया में इनफ्लेशन करीब 7 फीसदी है। एवरेज इनफ्लेशन 5 फीसदी रहा है। हालांकि, यह बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन इसके कई खतरे हैं। इसे काबू में करना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी। इनमें एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटना पहली प्राथमिकता होगी। इस साल मार्च में क्रूड का प्राइस 130 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था। एक महीने में यह 85 फीसदी उछला था। अब यह गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

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