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Budget 2023 : ग्रामीण अर्थव्यवस्था का खराब दौर बीत चुका है, मॉर्गन स्टेनली की चीफ इकोनॉमिस्ट की राय

बजट 2023 : कोरोना की महामारी की सबसे ज्यादा मार रूरल इकोनॉमी पर पड़ी थी। अब धीरे-धीरे हालात बदल रहे हैं। अगर सरकार बजट में ग्रामीण इलाकों के लिए आवंटन बढ़ाती है तो इससे कंज्यूमर सेंटिमेंट में मजबूती आएगी। उम्मीद है कि इस बार ग्रामीण इलाकों पर सरकार का फोकस बढ़ेगा

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jan 19, 2023 पर 1:25 PM
Budget 2023 : ग्रामीण अर्थव्यवस्था का खराब दौर बीत चुका है, मॉर्गन स्टेनली की चीफ इकोनॉमिस्ट की राय
बजट 2023: उपासना चाचरा ने कहा कि हम न सिर्फ रूरल इकोनॉमी में तेजी से सुधार देख रहे हैं बल्कि कारोबार के लिहाज से भी हालात पहले से बेहतर हुए हैं। इसकी बड़ी वजह कमोडिटी की ग्लोबल कीमतों में आई नरमी है।

बजट 2023 : कोरोना के लॉकडाउन के बाद बढ़ती महंगाई ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुश्किलें बहुत बढ़ा दी थी। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। हम सबसे खराब दौर को पीछे छोड़ चुके हैं। मॉर्गन स्टेनली की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट उपासना चाचरा ने यह बात कही है। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) और इंडियन इकोनॉमी के बारे विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यूनियन बजट 2023 में ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए सरकार आवंटन बढ़ा सकती है। अगर सरकार ग्रामीण इलाकों पर अपना खर्च बढ़ाती है तो इससे कंज्यूमर सेंटिमेंट मजबूत होगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।

ग्रामीण इलाकों पर पड़ी थी कोरोना की ज्यादा मार

चाचरा ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। इनफॉर्मल सेक्टर पर कोरोना की महामारी की मार पड़ी थी। अब लेबर फोर्स के मामले में भी हालात सामान्य हो रहे हैं। कोरोना की महामारी को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया था। इसका असर किसानों पर पड़ा है। कुल लेबर फोर्स में किसानों की हिस्सेदारी बढ़ी है। रूरल डिमांड कमजोर रहने की शिकायत कई FMCG कंपनियां कर चुकी हैं। इसका असर उनके वित्तीय नतीजों पर भी दिखा है।

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