Budget 2023: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नए बजट से NBFC इंडस्ट्री को हैं ये उम्मीदें

एनबीएफसी सेक्टर में एक के बाद एक घाटाले आने के बाद केंद्रीय बैंक ने एनबीएफसी से जुड़े नियमों को सख्त बनाया है। इनमें Infrastructure Leasing & Financial Services (IL&FS) और Dewan Housing Finance के घोटाले शामिल हैं

अपडेटेड Nov 25, 2022 पर 12:22 PM
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले साल 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।

Budget 2023: Non-Banking Financial Companies (NBFC) को उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इस बार के बजट में उनकी समस्याओं की सुध लेंगी। उनकी शिकायत यह है कि उनके लिए जो रेगुलेशंस बनाए गए हैं, वे बिल्कुल बैंकों के रेगुलेशंस जैसे हैं। इस वजह से वे NBFC के रूप में मिलने वाले फायदों से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने फाइनेंस मिनिस्ट्री को अपनी इस प्रॉब्लम के बारे में बताया है। एनबीएफसी की प्रतिनिधि संस्था Finance Industry Development Council (FIDC) ने 22 अक्टूबर को फाइनेंस मिनिस्ट्री को अपना ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है, "अगर एनबीएफसी को बैंकों की तरह रेगुलेट किया जाता है तो कर्ज देने के लिए एनपीएफसी के मॉडल पर असर पड़ेगा।" उसने कहा है कि इससे समाज के उस तबके की कर्ज की जरूरतें ठीक तरह से पूरी नहीं हो पाएंगी, जिनकी पहुंच बैंकिंग सर्विसेज तक नहीं है।

RBI का एप्रोच लंबे समय तक एनबीएफसी को लेकर सॉफ्ट रहा है। लेकिन, कुछ साल पहले से इसमें बदलाव आ रहा है। हाल में आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए भी नियमों को सख्त कर दिया है। वह पिछले कुछ सालों में एनबीएफसी इंडस्ट्री से जुड़े नियमों की खामियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल अक्टूबर में स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पेश किया था। ये 1 अक्टूबर, 2022 से लागू हो गए हैं।

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नए रेगुलेशंस में क्या है?

नए रेगुलेशंस में एनबीएफसी के कई पहलुओं को शामिल किया गया है। इनमें पूंजी की उनकी जरूरत, सरकार के मानक और प्रूडेंशियल रेगुलेशंस शामिल हैं। नए रेगुलेशंस फ्रेमवर्क में एनबीएफसी को उनके साइज, एक्टिविटी और पर्सिव्ड रिस्क के आधार पर तीन वर्गों में बांटा गया है। एसेट क्लासिफिकेशन से जुड़े नियमों को सबसे ज्यादा सख्त बनाया गया है। एसेट से जुड़े नए नियम बिल्कुल उसी तरह से हैं, जो बैंकों पर लागू होते हैं।

RBI के 12 नवंबर को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि एनबीएफसी पर लागू होने वाले एसेट के नियम उसी तरह से हैं, जो बैंकों पर लागू होते हैं। इसमें कहा गया है कि अगर लोन की किस्त 90 के अंदर नहीं चुकाई जाती है तो उसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) माना जाएगा। यह नियम बैंकों के लिए भी है। एनबीएफसी इस सख्त नियम से खुश नहीं हैं। इंडस्ट्री बॉडी ने कहा है, "इस नियम की वजह से 90 दिन के अंदर किस्त नहीं चुकाए जाने पर छोटे लोन लेने वाले ग्राहक पर NPA का टैग लग जाएगा। फिर यह टैग उस पर तब तक लगा रहेगा, जब तक वह कुल बकाया अमाउंट चुका नहीं देता। लोन नहीं चुकाने की वजह ऐसे हो सकती है, जो ग्राहक के नियंत्रण से बाहर है।"

RBI ने नियमों को क्यों सख्त बनाया?

एनबीएफसी सेक्टर में एक के बाद एक घाटाले आने के बाद केंद्रीय बैंक ने एनबीएफसी से जुड़े नियमों को सख्त बनाया है। इनमें Infrastructure Leasing & Financial Services (IL&FS) और Dewan Housing Finance के घोटाले शामिल हैं। दरअसल, कई बड़ी एनबीएफसी का कामकाज एक दूसरे से जुड़ा है। इसलिए एक एनबीएफसी के नाकाम होने पर उसका असर पूरी इंडस्ट्री पर पड़ता है। बैंकों ने भी बतौर लोन काफी पैसा एनबीएफसी को दिया है। 23 सितंबर, 2022 तक बैंकों ने एनबीएफसी इंडस्ट्री को 11.7 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया था।

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