Budget 2023: अगले फाइनेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर (Fertilizer) और फूड सब्सिडी (Food Subsidy) पर खर्च घटने से सरकार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना आसान हो जाएगा। ग्रामीण इलाकों पर भी सरकार का खर्च बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि अगले साल लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) होने वाले हैं। सरकार का फूड सब्सिडी मैनेजमेंट अच्छा रहा है। इसका फायदा सरकार को मिलेगा। सरकार ने कोरोना की महामारी के दौरान शुरू किए गए फ्री फूड प्रोग्राम को सब्सिडाइज्ड प्रोग्राम में मर्ज कर दिया। उसने पीएम गरीब कल्याण योजना को बंद कर दिया। रिस्ट्रक्चर्ड स्कीम के तहत दिसंबर 2023 तक मुफ्त खाद्यान्न मिलेगा। इससे फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में सब्सिडी पर होने वाला खर्च घटेगा।
फिस्कल डेफिसिट का टारगेट घटा सकती है सरकार
नोमुरा ने इसे सरकार का बहुत अच्छा कदम बताया है। इससे जनवरी से मार्च के तीन महीनों में जीडीपी के 0.16 फीसदी तक अमाउंट की बचत हो सकती है। इससे सरकार को इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट के 6.4 फीसदी के टारगेट को हासिल करना आसान होगा। सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट के टारगेट में करीब 0.50 फीसदी की कमी कर सकती है।
रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था सब्सिडी पर होने वाला खर्च
फर्टिलाइजर सब्सिडी पर खर्च घटने से भी सरकार को फायदा होगा। कमोडिटी की कीमतों में कमी और दूसरे देशों से रॉ मैटेरियल के आयात के समझौते से फर्टिलाइजर पर सब्सिडी खर्च में कमी आने की उम्मीद है। इस फाइनेंशियल ईयर में फूड और फर्टिलाइजर सब्सिडी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। पिछले साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमलों के बाद एनर्जी प्राइसेज बहुत बढ़ गए थे। इससे कई देशों में इनफ्लेशन बहुत बढ़ गया था।
ग्रामीण इलाकों के लिए भी आवंटन बढ़ने की उम्मीद
सब्सिडी खर्च में कमी सरकार के लिए वरदान से कम नहीं है। इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनावों से पहले के साल में सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ाना चाहती है। ग्रामीण इलकों के लिए भी वह अपना आवंटन बढ़ाना चाहती है। UBS India की इकोनॉमिस्ट तनवी गुप्ता जैन ने कहा कि सब्सिडी खर्च कम रहने से सरकार को ग्रामीण इलाकों से जुड़ी स्कीमों के लिए आवंटन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इनमें MGNREGA, रूरल हाउसिंग और सड़क प्रोजेक्ट्स से जुड़ी स्कीमें भी शामिल हैं।
9 लाख करोड़ रुपये रह सकता है कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारेगट
हालांकि, डायरेक्ट टैक्स के मोर्चे पर कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह है कि सुस्त पड़ती जीडीपी ग्रोथ की वजह से अगले फाइनेंशियल ईयर में टैक्स कलेक्शन में कमी आ सकता है। इक्रा की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिती नायर का कहना है कि अगले साल चुनाव को देखते हुए सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिल सकती है। सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 8.5-9 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान कर सकती है। इस फाइनेंशियल ईयर में सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये का टारगेट रखा है।