बायबैक टैक्स से कंपनियों को बजट में राहत मिलने के आसार कम है। सूत्रों के मुताबिक टैक्स देनदारी कंपनी की बजाय शेयरहोल्डर्स पर शिफ्ट करने के सेबी के प्रस्ताव पर वित्तमंत्रालय सहमत नहीं है। सेबी ने डिविडेंड इनकम के तर्ज पर बायबैक की प्रक्रिया में भी टैक्स का बोझ कंपनी के बजाय शेयरहोल्डर्स पर डालने की मांग की थी। सेबी की इस मांग पर वित्त मंत्रालय सहमत नहीं नजर आ रहा है। वित्त मंत्रालय को ये ठीक नहीं लग रहा है कि बायबैक प्रक्रिया में टैक्स का बोझ शेयरधारकों के कंधे पर डाला जाये। सूत्रों के मुताबिक टैक्स से कंपनियों को राहत देन के लिए इस संबंध में सेबी ने कंपनियों को राहत देने का प्रस्ताव भेजा था। इस पर वित्त मंत्रालय से हरी झंडी नहीं मिल सकी है।
इस खबर पर ज्यादा डिटेल बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि बायबैक टैक्स और बजट की बात करें तो सूत्र बता रहे हैं कि बायबैक में कंपनियों को ही टैक्स का बोझ उठाना पड़ेगा। सेबी के प्रस्ताव पर वित्तमंत्रालय से हरी झंडी मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कंपनियों को राहत देने का प्रस्ताव सेबी ने भेजा था।
सूत्रों का कहना है कि CBDT ने टैक्स से राहत दिये जाने के लिए विदेशी टैक्स ट्रीटी, रेवेन्यू नुकसान का हवाला दिया था। उन्होंने ये भी कहा था कि तकनीकी कारणों से विदेशी निवेशकों से टैक्स वसूली करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आलोक प्रियदर्शी ने आगे कहा कि डिविडेंड इनकम के तर्ज पर बायबैक में भी टैक्स लगाने की मांग की गई थी। सूत्रों का कहना है कि इसमें शेयरों के बायबैक में शामिल निवेशकों पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया था।