Budget 2023: प्लास्टिक इंडस्ट्री ने पॉलीमर्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की मांग की

Budget 2023: प्लास्टिक इंडस्ट्री से जुड़ी संस्थाओं और एसोसिएशंस की एपेक्स बॉडी प्लास्टइंडिया फाउंडेशन ने अपना मांग के बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री को बताया है। उसका मानना है कि मांग पूरी होने से प्लास्टिक इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज होगी साथ ही इंडियन प्लास्टिक कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी

अपडेटेड Jan 07, 2023 पर 6:49 PM
इंडिया में प्लास्टिक इंडस्ट्री का आकार बढ़कर 2025 तक 35 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है। अभी यह 32 अरब डॉलर है।

Budget 2023: प्लास्टिक इंडस्ट्री अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) में पॉलीमर्स (Polymers) के आयात शुल्क में कमी चाहती है। इंडस्ट्री का कहना है कि अभी देश में पॉलीमर्स का उत्पादन बहुत कम है। इसलिए इंडस्ट्री को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए इसका आयात करना पड़ता है। प्लास्टिक इंडस्ट्री ने इस बारे में वित्त मंत्री को बताया है। प्लास्टिक इंडस्ट्री से जुड़ी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले प्लास्टइंडिया फाउंडेशन ने कहा कि पॉलीमर्स पर इंपोर्ट ड्यूटी 5 से 7.5 फीसदी होनी चाहिए। उसने कहा है कि अगर फाइनेस मिनिस्टर उसकी मांग मान लेती है तो इससे प्लास्टिक इंडस्ट्री की ग्रोथ बढ़ेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी।

अभी पॉलीमर्स पर 10 फीसदी है आयात शुल्क

प्लास्टइंडिया फाउंडेशन का कहना है कि अभी पॉलीमर्स के आयात पर 10 फीसदी आयात शुल्क चुकाना पड़ता है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसे कम कर 5 से 7.5 फीसदी तक लाने की जरूरत है। उसने कहा है कि इंडिया में पॉलीमर्स का पर्याप्त उत्पादन नहीं होता है। ऐसे में अगर सरकार पॉलीमर्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाती है तो इससे इंडियन इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।


यूनियन बजट 2023 आने में बाकी हैं सिर्फ कुछ हफ्ते, इसकी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

फिनिश्ड प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाए

फाउंडेशन ने यह भी कहा है कि सरकार को फिनिश्ड प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी लगानी चाहिए। सरकार कम से कम 20 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगा सकती है। इससे घरेलू इंडस्ट्री को फायदा होगा। प्लास्टइंडिया फाउंडेशंस प्लास्टिक से जुड़े संस्थाओं, संगठनों और एसोसिएशंस का एपेक्स बॉडी है। उसने यह भी कहा है कि प्लास्टिक इंडस्ट्री को ऐसे कंपोनोंट का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है, जिनका इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में होता है। इंडिया में प्लास्टिक इंडस्ट्री का आकार बढ़कर 2025 तक 35 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है। अभी यह 32 अरब डॉलर है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।