Budget 2023: क्लीन एनर्जी इंडस्ट्री (Clean Energy Industry) को अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) से बहुत उम्मीदें हैं। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर्स और यूटिलिटी-स्केल बैटरीज के लिए PLI स्कीम का ऐलान कर सकती हैं। ReNew Power के चेयरमैन एवं सीईओ सुमंत सिन्हा ने ये बातें कही हैं। निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। सिन्हा ASSOCHAM के प्रेसिडेंट भी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सोलर पावर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए आवंटन बढ़ाने का ऐलान करना चाहिए। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग के वास्ते PLI स्कीम के तहत 19,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया था।
ऑफशोर विंड सेक्टर के लिए आवंटन बढ़ाने की जरूरत
सिन्हा ने कहा कि सरकार को यूटिलिटी- स्केल स्टोरेज के लिए बैटरीज पर जीएसटी और कस्टम ड्यूटी में कमी करने की जरूरत है। अभी इन पर कस्टम ड्यूटी करीब 30 फीसदी है। इसे घटाकर 10 फीसदी तक लाने की जरूरत है। सरकार को ऑफशोर विंड सेक्टर के लिए आवंटन और वायबिलिटी गैप फंडिंग के लिए भी कदम उठाना चाहिए। इससे पहले एसोचैम ने बजट से पहले फाइनेंस मिनिस्ट्री को की गई सिफारिशों में इनकम टैक्स से छूट के लिए आय की सीमा बढ़ाकर कम से कम 5 लाख रुपये करने की मांग की थी। इससे लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे।
सभी सेक्टर में नए निवेश पर 15 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स होना चाहिए
एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे आने के उपायों से कंजम्प्शन को बढ़ावा मिलेगा। इकोनॉमी में रिकवरी की रफ्तार बढ़ाने के लिए यह सबसे आसान उपाय होगा। उद्योग चैंबर ने मैन्युफैक्चरिंग में नए निवेश के लिए 15 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स को दूसरे सेक्टर के लिए भी लागू करने की मांग की है। सरकार को जीएसटी चुकाने में देरी पर 18 फीसदी इंटरेस्ट रेट को घटाकर 12 फीसदी करने की जरूरत है। सरकार को ग्रीन इंडस्ट्रीज में निवेश बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने वाले उपाय होने चाहिए
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ऐसे वक्त यूनियन बजट पेश करने जा रही हैं, जब ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा बढ़ रहा है। इधर, इंडियन इकोनॉमी की सेहत अच्छी है। इंडिया दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है। सरकार बजट में इकनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने के उपायों पर फोकस कर सकती है। हालांकि, इंटरेस्ट रेट लगातार बढ़ने से पूंजीगत खर्च पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।