Budget 2023: सीएनबीसी-आवाज़ के बजट स्पेशल टैक्स गुरू में ये जानने की कोशिश हो रही है कि बजट 2023 में सरकार को नौकरी पेशा टैक्सपेयरों को रहत देने के लिए क्या करना चाहिए। इस चर्चा में भाग ले रहे हैं जाने माने टैक्स एक्सपर्ट मुकेश पटेल, शरद कोहली और गौरी चढ्ढा। युवा टैक्सपेयर की FM से मांग है कि निवेश के हिसाब से डिडक्शन मिलना चाहिए 80C की डिडक्शन लिमिट 2.5 लाख रुपए की जानी चाहिए। नौकरी पेशा करदाताओं का कहना है कि हाल के दिनों महंगाई बढ़ी है लेकिन उनकी सैलरी घटी है। ऐसे में इन्फ्लेशन रिबेट मिलना जरूरी है।
80C का दायरा बढ़ाने से टैक्स कलेक्शन पर होगा असर
इस पर गौरी चढ्ढा का कहना हौ कि इस बजट में 80C का दायरा बढ़ने की उम्मीद कम है। सरकार का फोकस न्यू टैक्स रिजीम पर है। ऐसे में ओल्ड रिजीम में बदलाव की आशा कम है। गौरी की राय है कि 80C डिडक्शंस को सब कैटगरीज में बांटा जाना चाहिए। निवेश और खर्चों को अलग रखा जाना चाहिए। गौरी का कहना है कि 80C का दायरा बढ़ाने से टैक्स कलेक्शन पर असर होगा। लेकिन निवेश को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा। 80C की लिमिट पिछली बार 2014 में बढ़ी थी।
मेडिकल खर्चों में डिडक्शन का दायरा बढ़े
गौरी ने आगे कहा कि 80D में मेडिकल और हेल्थ इंशोरेंस पर डिडक्शन मिलता है। मेडिकल खर्चों में डिडक्शन का दायरा बढ़ना चाहिए। इसमें हेल्थ इंशोरेंस के हिसाब से छूट मिलनी चाहिए। सरकार को मेडिकल खर्चों पर टैक्स छूट बढ़ाना चाहिए। 80D के डिडक्शन लिमिट की बात करें तो नॉन सीनियर सिटीजन की डिडक्शन लिमिट 25000 रुपए और सीनियर सिटीजन की 50000 रुपए की सीमा है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन को इन्फ्लेशन से करें लिंक
मुकेश पटेल का कहना है कि नौकरीपेशा टैक्सपेयर सबसे ईमानदार टैक्सपेयर है। इसको बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। नौकरी पेशा करदाता को राहत देने को लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को इन्फ्लेशन से लिंक करें। टैक्स स्लैब भी वाजिब होने चाहिए। 5 फीसदी टैक्स स्लैब के बाद 20 फीसदी स्लैब आता है। 5 फीसदी टैक्स स्लैब के बाद 10 फीसदी,15 फीसदी, 20 फीसदी जैसे वाजिब टैक्स स्लैब होने चाहिए। LTCG पर इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है। सैलरी वालों को भी इन्फ्लेशन का फायदा मिलना चाहिए। टैक्स लेते समय महंगाई को एडजस्ट किया जाना चाहिए।
Old Regime ज्यादा फायदेमंद!
शरद कोहली का कहना है कि New Tax Regime को खास रिस्पांस नहीं मिला है। New Regime को लुभावना बनाना होगा। दोनों रिजीम का तालमेल बैठाना होगा। नए रिजीम में हाउसिंग लोन का फायदा नहीं मिलता। दोनों रिजीम का समन्वय साधना होगा। सरकार का फोकस टैक्स को सरल बनाने पर होना चाहिए। वहीं, गौरी का कहना है कि New Regime आकर्षक बनाने के लिए स्लैब रेट कम करना होगा। वहीं, मुकेश पटेल का कहना है कि करदाता रिजीम चुनने की दुविधा में फंसा हुआ है। रिजीम बदलाव की सहूलियत नही मिलनी चाहिए Old Regime ज्यादा फायदेमंद है।
टैक्स स्लैब का हो रेशनलाइज, टैक्स बेस बढ़े
टैक्स पेयर्स की मांग है कि 2.50 लाख की टैक्स सीमा बढ़ानी चाहिए। सरकार को 5 लाख की थ्रेसहोल्ड लिमिट बढ़ानी चाहिए। ज्यादा लोगों को इनकम टैक्स के दायरे में लाना चाहिए। मुकेश पटेल का कहना है कि फिलहाल 2.5 लाख रुपए तक टैक्स नहीं लगता है। इस लिमिट को 5 लाख रुपए तक बढ़ाने की मांग है। सरकार को टैक्स स्लैब को रेशनलाइज करना चाहिए। शरद कोहली का कहना है कि 7 करोड़ लोगों ने रिटर्न फाइल किए और सिर्फ 1.5 करोड़ लोगों ने टैक्स भरा है। देश की 140 करोड़ जनता में सिर्फ 1.5 करोड़ लोगों ने टैक्स भरा। 2.50 लाख की टैक्स सीमा नहीं बढ़ानी चाहिए। टैक्स का बेस बढ़ाने की जरूरत है। वहीं, गौरी चढ्ढा की राय है कि टैक्स सीमा बढ़ाने के बजाय रिबेट बढ़ाने की जरूरत है।