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Union Budget@10: 10 साल में रिन्यूबएल एनर्जी पर बढ़ा जोर, लेकिन ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर चुनौतियां कायम

पिछले एक दशक में भारत में बिजली की मांग 135 गीगावॉट से बढ़कर 240 गीगावॉट हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2014 में एनर्जी की कमी 4.2 पर्सेंट थी और वित्त वर्ष 2024 में यह आंकड़ा घटकर 0.2 पर्सेंट हो गया। हालांकि, देश में बिजली की मांग बढ़कर 335 गीगावॉट तक पहुंच सकती है और ऐसे मे बिजली को किफायती बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 25, 2023 पर 9:58 PM
Union Budget@10: 10 साल में रिन्यूबएल एनर्जी पर बढ़ा जोर, लेकिन ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर चुनौतियां कायम
वित्त वर्ष 2014-15 में न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को आवंटन 956 करोड़ रुपये था, जो 2023 में बढ़कर 10,122 करोड़ रुपये हो गया।

पिछले एक दशक में भारत में बिजली की मांग 135 गीगावॉट से बढ़कर 240 गीगावॉट हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2014 में एनर्जी की कमी 4.2 पर्सेंट थी और वित्त वर्ष 2024 में यह आंकड़ा घटकर 0.2 पर्सेंट हो गया। हालांकि, देश में बिजली की मांग बढ़कर 335 गीगावॉट तक पहुंच सकती है और ऐसे मे बिजली को किफायती बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने साल 2030 तक कोयला के जरिये तकरीबन 80 गीगावॉट की नई क्षमता जोड़ने का ऐलान किया है। इसके साथ ही भारत की रिन्यूएबल एनर्जी और हाड्रोपावर क्षमताओं में भी बढ़ोतरी होगी। सरकार ने सिर्फ रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में 500 गीगावॉट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।

ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह ने मनीकंट्रोल को बताया, ' देश के पावर सेक्टर ने पिछले एक दशक में लंबा सफर तय किया है और भारत पावर डेफिसिट से पावर सरप्लस देश में बदल गया है।' हालांकि, कुछ सेगमेंट में पावर सेक्टर की ग्रोथ सुस्त भी हुई है। मनीकंट्रोल ने पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अहम सफलताओं और नाकामियों की पड़ताल की है।

कंज्यूमर्स के अधिकार: सरकार ने बिजली (कंज्यूमर्स के अधिकार) कानून, 2020 लागू किया है, जिसमें पहली बार बिना शेड्यूल वाली बिजली कटौती पर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (discoms) को कंज्यूमर्स की भरपाई करने की बात है। नियमों में कंज्यूमर्स को सर्विस देने के लिए डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के लिए समयसीमा भी तय की गई है।

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