Budget 2024: वित्तमंत्री 23 जुलाई को बजट पेश करेंगी। बजट से पहले हर सेक्टर से जुड़े लोग अपनी मांग सरकार के आगे रख रही है। भारत के तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने के बीच साइबर सुरक्षा एरिया से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आगामी केंद्रीय बजट में धन के आवंटन के माध्यम से देश के डिजिटल एरिया की सुरक्षा को बढ़ावा देने के उपाय शामिल होंगे।
इनेफू लैब्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और को फाउंडर तरुण विग ने कहा कि दुनियाभर का ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित होना भारत के लिए जरूरी है। विग ने कहा कि एआई और मशीन लर्निंग मॉडल सॉफ्टवेयर पर कोई भी हमला होने से रोकने तथा उसकी पहचान करने में मददगार हो सकता है। लेकिन इसके लिए टॉप साइबर प्रतिभा को बढ़ने पोषित करने व बनाए रखने और साइबर सुरक्षा के लिए एआई मॉडल के रिसर्च और एजुकाशने में निवेश करने के लिए कंपनियों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की मदद की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि जब अन्य देश अपने एआई बुनियादी ढांचे के निर्माण में व्यस्त हैं, तो भारत को एआई में प्राथमिकता देनी चाहिए जिसमें हमारी रक्षा और खुफिया स्थिति में सुधार लाने, साइबर अपराधों को कम करने, मनी लॉन्डरिंग के नेटवर्क की पहचान करने या शासन को देश के दूर दराज के गांवों तक ले जाने के लिए एआई और एमएल मॉडल को प्रशिक्षित करना शामिल हो सकता है।
विग ने कहा कि केवल शिक्षा जगत के अलावा प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के लिए रिसर्च और विकास पहल के लिए सरकारी सहयोग मिलने से काफी मदद मिलेगी। यह एक डिजिटल माहौल को बढ़ावा देगा जो एआई तथा अन्य उभरती तकनीकम में भविष्य की प्रगति को बढ़ावा दे सकता है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में उभरती हुई आईटी में रिसर्च और विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की थी। साइबर सुरक्षा पर निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं के लिए निवेश के समान है। उन्होंने कहा कि भारत दुनियाभर में साइबर हमलों का शिकार बनने वाले देशों में से एक है। शेखर ने कहा कि जहां सरकार देश के प्रत्येक नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है, वहीं उन्हें सुरक्षित करना भी जरूरी हो जाता है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि 2047 तक विकसित भारत की आकांक्षा को पूरा करने के लिए ‘साइबर सुरक्षा क्षेत्र में भारतीय अग्रणी’ बनाने पर विचार करें।