Budget 2024 Expectations : यूनियन बजट 2024 (Union Budget 2024) पेश होने की तारीख नजदीक आ गई है। 1 फरवरी, 2024 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अंतरिम बजट पेश करेंगी। टैक्सपेयर्स को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। हालांकि, फाइनेंस मिनिस्टर यह साफ कर चुकी है कि 1 फरवरी, 2024 को आने वाला बजट सिर्फ वोट ऑन अकाउंट होगा। फिर भी टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि फाइनेंस मिनिस्टर इस बार उन्हें बड़ी राहत दे सकती हैं। 2019 के अंतरिम बजट में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने टैक्सपेयर्स के लिए कई ऐलान किए थे। अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। यह माना जाता है कि चुनाव से पहले आने वाले बजट में सरकार लोगों को राहत देने वाले उपाय करती है।
पिछले कई सालों से नहीं बढ़ी है डिडक्शन की लिमिट
मनीकंट्रोल ने कई टैक्सपेयर्स से बातचीत की। उनसे यह पूछा कि यूनियन बजट से वे क्या चाहते हैं? इस सवाल के जवाब में सबसे ज्यादा टैक्सपेयर्स ने हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने जाने की मांग की। टैक्सपेयर्स का कहना है कि पिछले कई सालों से हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट नहीं बढ़ाई गई है। इस बीच हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम काफी बढ़ गया है। ऐसे में टैक्सपेयर्स खुद और अपने परिवार के लिए प्रीमियम चुकाने पर जितने पैसे खर्च करते हैं, उस पूरे पैसे पर उन्हें टैक्स में डिडक्शन नहीं मिलता है। इसलिए सरकार को पिछले सालों में प्रीमियम में हुए इजाफे को देखते हुए डिडक्शन की लिमिट जल्द बढ़ा देनी चाहिए।
व्यक्ति और परिवार के लिए डिडक्शन लिमिट 50,000 करने की जरूरत
अभी कोई व्यक्ति खुद या अपने परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर सालाना 25,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकता है। माता-पिता (सीनियर सिटीजंस) के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर अभी 50,000 रुपये के डिडक्शन की इजाजत है। टैक्सपेयर्स का कहना है कि सरकार को इस लिमिट को जल्द बढ़ाने की जरूरत है। इंडिविजुअल और उसके परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की जरूरत है। माता-पिता के लिए हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर 75,000 रुपये सालाना की जानी चाहिए। इनकम टैक्स एक्ट के 80डी के तहत हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन का दावा करने की इजाजत है।
कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में समानता जरूरी
टैक्सपेयर्स की दूसरी मांग लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस से जुड़ी है। उनका कहना है कि अभी अलग-अलग एसेट के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। इससे टैक्सपेयर्स को काफी कनफ्यूजन रहता है। सरकार को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव करना चाहिए। सरकार को एकसमान लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियम बनाने चाहिए। इससे एक तरफ टैक्सपेयर्स को फायदा होगा तो दूसरी तरफ टैक्स कंप्लायंस बढ़ेगा। इससे सरकार को अपना रेवेन्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी।