Budget 2024 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में मोटे अनाजों (Millets) का खास तौर पर उल्लेख किया था। उम्मीद है कि Union Budget 2024 में मोटे अनाजों पर सरकार का खास फोकस होगा। फाइनेंस मिनिस्टर Nirmala Sitharaman 1 फरवरी, 2024 को यूनियन बजट पेश करेंगी। उन्होंने इस साल पेश बजट में कहा था कि इंडिया मोटे अनाजों का सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि निर्यात के मामले में दूसरे नंबर पर है। इंडिया में कई तरह के मोटे अनाजों का उत्पादन होता है। इनमें ज्वार, रागी, बाजरा, कुट्टु और कोदो शामिल हैं। सरकार का मानना है कि मोटे अनाज ज्यादा पौष्टिक होते हैं। लोगों में इनका इस्तेमाल बढ़ने से ज्यादा एक तरफ सेहत के लिहाज से फायदा होगा तो दूसरी तरफ इंडिया के फूड बास्केट पर प्रेशर घटेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रहा है फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मोटे अनाजों का इस्तेमाल बढ़ाने पर काफी फोकस रहा है। वे अक्सर अपने कार्यक्रम में लोगों से इनका इस्तेमाल करने को कहते हैं। इस साल जनवरी के आखिर में मन की बात में उन्होंने कहा था कि दुनिया अब मोटे अनाजों का महत्व समझने लगी है। फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशंस और आंत्रप्रेन्योर ने मोटे अनाजों पर फोकस बढ़ाया है। वे इन्हें लोगों को उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। मोटे अनाजों को लेकर दुनिया की सोच बदली है। इसका फायदा इंडिया के छोटे-बड़े किसानों को मिल रहा है। अब बड़े शहरों में रहने वाले लोग मोटे अनाजों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।
मोटे अनाजों की खपत बढ़ने से किसानों को फायदा
मोटे अनाजों की खपत बढ़ने का सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 फरवरी को एक कार्यक्रम में मोटे अनाजों को श्री अन्न कहा था। उन्होंने बताया था कि क्यों वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में मोटे अनाजों का खास तौर पर उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि श्री अन्न का मतलब सबसे उत्तम अनाज होता है। उन्होंने बताया था कि कर्नाटक में लोग मोटे अनाजों को 'श्री धान्य' कहते हैं। इसी से श्री अन्न शब्द निकला है।
फूड बास्केट पर घटेगा दबाव
एक्सपर्टस का कहना है कि मोटे अनाजों का इस्तेमाल बढ़ने से कई फायदे होंगे। पहला, ये सेहत के लिए अच्छे हैं। दूसरा, इससे छोटे किसानों की इनकम बढ़ेगी। इसके अलावा इंडिया में फूड बास्केट पर दबाव कम होगा। अभी देश में सबसे ज्यादा खपत गेहूं और चावल की है। लगातार एक ही फसल की खेती करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर खराब असर पड़ता है। मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ने से किसान गेहू और धान की जगह मोटे अनाजों की खेती शुरू करेंगे। इससे फूड बास्केट पर दबाव कम होगा।