Budget 2024: हॉस्पिटल में इलाज का खर्च घटान के लिए उपायों का ऐलान कर सकती हैं निर्मला सीतारमण

प्राइवेट अस्पताल इलाज के लिए मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। इसकी एक वजह यह है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी है। साथ ही प्राइवेट अस्पतालों के लिए फीस को लेकर कोई मानक तय नहीं है। वित्तमंत्री अगले महीने पेश होने वाले बजट में इस बारे में बड़ा ऐलान कर सकती हैं

अपडेटेड Jun 29, 2024 पर 11:49 AM
इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान किए थे। इस सेक्टर के लिए उन्होंने 90,171 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन किया था।

सरकार अगले महीने पेश होने वाले बजट में हेल्थकेयर पर फोकस बढ़ा सकती है। खासकर वह अस्पताल में इलाज के खर्च में कमी लाने के लिए उपाय कर सकती हैं। इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान किए थे। इस सेक्टर के लिए उन्होंने 90,171 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन किया था। यह एक साल पहले के 79,221 करोड़ रुपये के ऐलोकेशन से काफी ज्यादा था।

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए हो सकता है बड़ा ऐलान

निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा था कि सरकार हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर (Healthcare Infrastructure) को मजबूत बनाने पर फोकस बढ़ाएगी। प्रिवेंटिव केयर पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा ताकि लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़े। उन्होंने सर्वाइकल कैंसर को बढ़ने से रोकने के लिए बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि इसके लिए 9-14 साल की लड़कियों के वैक्सिनेशन के लिए सरकार नई स्कीम शुरू करेगी।


प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाने की जरूरत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरिम बजट में हेल्थकेयर पर सरकार का फोकस बढ़ा था। लेकिन, जमीनी स्तर पर ज्यादा बदलाव नहीं आया है। सरकार जुलाई में पेश होने वाले बजट में ठोस उपायों का ऐलान कर सकती है, जिससे इलाज पर लोगों के खर्च में कमी आ सकती है। अभी खासकर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना बहुत महंगा हो गया है। उम्मीद है कि आम लोगों की इस दिक्कत को ध्यान में रख सरकार बड़े कदम उठाएगी।

इलाज के खर्च के लिए जल्द तय किया जाए स्टैंडर्ड

इस साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट हॉस्पिटल्स की तरफ से इलाज के लिए वूसली जा रही कीमतों पर सरकार की खिंचाई की थी। अभी छोटे-बड़े अस्पताल एक ही बीमारी के इलाज के लिए अलग-अलग फीस वसूलते हैं। किसी तरह का दिशानिर्देश नहीं होने से वे मनमानी करते हैं। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने अस्पतालों की तरफ से वसूली जा रही फीस के लिए मानक तय करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की पहल की है।

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ग्रामीण इलाकों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की जरूरत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की जरूरत है। खासकर ग्रामीण इलाकों के सरकार अस्पतालों पर फोकस करना होगा। अभी ग्रामीण इलाकों में इलाज की अच्छी सुविधाएं नहीं होने से लोग शहर जाने को मजबूर होते हैं। वहां प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हेल्थकेयर पर लोगों के खर्च में कमी लाने के लिए सरकार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए टेलीमेडिसिन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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