Budget 2024: आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuran Rajan) ने कहा है कि इंडिया दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है। लेकिन जॉब क्रिएशन इसके लिए सबसे बड़ा चैलेंज है। यूनियन बजट 2024 से ठीक पहले राजन का यह बयान सरकार की आंखें खोलने वाला है। सवाल है कि क्या 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाले अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जॉब क्रिएशन के लिए रोडमैप पेश करेंगी। वह पहले बता चुकी हैं कि अंतरिम बजट में सरकार बड़े ऐलान नहीं करेगी। बड़े ऐलान के लिए जुलाई में आने वाले पूर्ण बजट का इंतजार करना होगा। लेकिन, सरकार लोकसभा चुनावों से पहले पेश अंतरिम बजट में उन प्रॉब्लम्स को एड्रेस करने के लिए रोडमैप पेश कर सकती है, जो इंडियन इकोनॉमी के लिए बड़ी चुनौती हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद अगर केंद्र में तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनती है तो सरकार उस रोडमैप पर अमल कर सकती है।
आबादी इंडिया की सबसे बड़ी ताकत
रघुराम राजन ने रोहित लांबा के साथ मिलकर एक किताब लिखी है। इसका नाम Breaking the mould: Reimagining India's economic future है। अपनी किताब के बारे में चर्चा के दौरान राजन ने कहा कि इंडिया की सबसे बड़ी ताकत इसकी 1.4 अरब की आबादी है। सवाल है कि इसे कैसे मजबूत बनाया जा सकता है? उन्होंने कहा कि इंडिया को विकास के हर चरण पर नौकरियों के मौके पैदा करने पर फोकस करना होगा। राजन अमेरिका की शिकागो बूथ यूनिवर्सिटी में फाइनेंस के प्रोफेसर हैं। रोहित लांबा पेनीसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
राज्यों का नौकरियां रिजर्व करना ठीक नहीं
RBI के पूर्व गवर्नर ने कहा, "जॉब्स अकेला सबसे बड़ा प्रेशर प्वाइंट है... अगर हमारे पास प्राइवेट सेक्टर में ज्यादा नौकरियां होती तो क्या लोग रिजर्वेशन की इतनी ज्यादा मांग करते? शायद प्राइवेट सेक्टर में ज्यादा नौकरियां होने पर रिजर्वेशन पर इतना जोर नहीं होता।" राजन ने कहा कि यह दुखद है कि राज्य सरकारें नौकरियां अपने राज्य के लोगों के लिए रिजर्व कर रही हैं। यह चिंताजनक ट्रेंड है।
युवाओं को शिक्षित करने पर फोकस करना होगा
राजन ने कहा, "...इससे यह पता चलता है कि हम पर्याप्त नौकरियों के मौके नहीं बना रहे हैं। मैं यह कहना चाहूंगा कि यह चिंता की बड़ी बात है। हम एक यूनाइटेड कंट्री हैं। आप अपने राज्य में नौकरियों को सिर्फ अपने राज्य के लोगों के लिए रिजर्व नहीं कर सकते। यह सबके लिए उपलब्ध होना चाहिए। हमें एक-दूसरे राज्यों के माइग्रेशन से फायदा हुआ है।" उन्होंने कहा कि अगर हमारे युवा अच्छी तरह से शिक्षित होते हैं और हम उन्हें वोकेशनल ट्रेनिंग देते हैं तो अगले छह महीनों या एक साल में नौकरियों के काफी मौके पैदा हो सकते हैं। ऐसे में इंडिया को रोजगार के मौकों के लिए अगले 10 साल इंतजार नहीं करना होगा।