Budget 2024: पिछले 10 साल में देश में 25 गुना से ज्यादा बढ़ गई यूनिकॉर्न की संख्या

Budget 2024: 2014 में भारत में सिर्फ 4 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न की कैटगरी में थीं, जिनकी संख्या अब काफी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के आंकड़ों की मानें तो तकरीबन 10 साल में भारत यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के मामले में काफी लंबा सफर तय कर चुका है। आज न सिर्फ भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार तेज है, बल्कि यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की संख्या भी डबल डिजिट का आंकड़ा पार कर चुकी है। यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है, जिनका वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से ज्यादा होता है

अपडेटेड Jan 14, 2024 पर 3:19 PM
कोरोना के दौरान यूनिकॉर्न की जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली।

Budget 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया इंटरेशनल समिट 2021 में कहा था, '2014 में भारत में सिर्फ 4 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न की कैटगरी में थीं, जिनकी संख्या अब काफी तेजी से बढ़ रही है।' सरकार के आंकड़ों की मानें तो तकरीबन 10 साल में भारत यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के मामले में काफी लंबा सफर तय कर चुका है। आज न सिर्फ भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार तेज है, बल्कि यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की संख्या भी डबल डिजिट का आंकड़ा पार कर चुकी है।

यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है, जिनका वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से ज्यादा होता है। ये स्टार्टअप्स न सिर्फ इनोवेटिव सॉल्यूशंस और टेक्नोलॉजी उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि इनके जरिये बडे़ पैमाने पर रोजगार भी पैदा हो रहा है। 3 अक्टूबर, 2023 तक के सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में यूनिकॉर्न की कुल संख्या बढ़कर 111 हो गई है, जिनका कुल वैल्यूएशन 349.67 अरब डॉलर है।

फाइनेंशियल ईयर 2016-17 तक यूनिकॉर्न की लिस्ट में हर साल तकरीबन एक कंपनी ही जुड़ रही थी। फाइनेंशियल ईयर 2017-18 से इस संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। इस दौरान यूनिकॉर्न की संख्या में सालाना 66 पर्सेंट की ग्रोथ हुई। आंकड़ों के मुताबिक, यूनिकॉर्न की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 2021 में हुई।


इस दौरान कुल 45 स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न की लिस्ट में शामिल किया गया, जिनकी कुल वैल्यूएशन 102.30 अरब डॉलर थी। 2022 में यूनिकॉर्न की लिस्ट में शामिल होने वाली कंपनियों की संख्या 22 थी, जिनकी कुल वैल्यू 29.20 अरब डॉलर थी। इसके अलावा, 2019 और 2020 में क्रमशः 7 और 11 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न बनीं। हालांकि, 2023 में अब तक सिर्फ एक स्टार्टअप जेप्टो (Zepto) ही यूनिकॉर्न की सूची में शामिल हो पाई है।

कोरोना के दौरान यूनिकॉर्न की जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली। भौगोलिक जरिये से देखा जाए, तो बेंगलुरु को यूनिकॉर्न की राजधानी कहा जा सकता है। यहां सबसे ज्यादा यूनिकॉर्न हैं और इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और मुंबई का नंबर है। यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करने वाली कंपनियों में ज्यादातर ई-कॉमर्स, फिन-टेक, सप्लाई-चेन और लॉजिस्टिक्स, इंटरनेट सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज जैसे परंपरागत सेक्टर से जुड़ी हैं। हालांकि, कंटेंट, गेमिंग, हॉस्पिटैलिटी, डेटा मैनेजमेंट एंड एनालिटिक्स जैसे गैर-परंपरागत सेक्टरों की कंपनियां भी इस सूची में अपनी जगह बना रही हैं।

हर स्टार्टअप के यूनिकॉर्न बनने की कहानी अलग-अलग है। साथ ही, इस लक्ष्य को हासिल करने में स्टार्टअप्स को लगने वाला समय-समय भी अलग-अलग रहा। किसी स्टार्टपअप को यूनिकॉर्न बनने में लगने वाला सबसे कम समय 6 महीने का था, जबकि सबसे ज्यादा समय 26 साल था। मेन्सा ब्रांड्स (Mensa Brands) 2021 में सिर्फ 6 महीने में यूनिकॉर्न बन गई थी। यह एशिया में सबसे तेजी से यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करने वाली स्टार्टअप्स में शामिल थी।

पब्लिक लिस्टिंग अगला ठिकाना

भारतीय यूनिकॉर्न अब अपनी ग्रोथ संभावनाओं का पूरा-पूरा इस्तेमाल करने के लिए पब्लिक लिस्टिंग के विकल्प को धड़ल्ले से आजमा रहे हैं। IPO लाने वाली कुछ बड़ी यूनिकॉर्न में जोमैटो (Zomato), नायका (Nykaa), पॉलिसीबाजार (PolicyBazaar), पेटीएम (Paytm), फ्रेशवर्क्स (Freshworks) आदि शामिल हैं। इसके अलावा कुछ और यूनिकॉर्न स्टार्टअर्स IPO लाने की तैयारी में हैं, मसलन डेल्हीवरी (Delhivery), मोबिक्विक (Mobikwik) और कारदेखो (CarDekho)। आज हर 10 में से 1 यूनिकॉर्न भारत में बन रही है। कुल मिलाकर कहा जाए, तो भारत में स्टार्टअप का इकोसिस्टम काफी मजबूत है।

यूनिकॉर्न के निवेशक

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 की पहली छमाही में स्टार्टअप से जुड़ी 891 फंडिंग डील हुईं, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 82.8 पर्सेंट ज्यादा (541 डील) है। भारत की यूनिकॉर्न और स्टार्टअप्स में निवेश को लेकर सबसे ज्यादा एक्टिव सिकोइया कैपिटल (Sequoia Capital) रहा है।

इसके अलावा, टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट (Tiger Global Management), बेटर कैपिटल (Better Capital), इनफ्लेक्शन प्वाइंट वेंचर्स (Inflection Point Ventures), लेट्सवेंचर (LetsVenture), एक्सेल (Accel), ब्ल्यूम वेंचर्स (Blume Ventures), 9यूनिकॉर्न्स (9Unicorns) और अल्फा वेव ग्लोबल (Alpha Wave Global) प्रमुख निवेशक हैं।

किन सेक्टरों में हो रहा ज्यादा निवेशक

फिनटेक, एडुटेक, ई-कॉमर्स, सोशल नेटवर्क, सोशल नेटवर्क, फूडटेक, लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर टेक आदि सेक्टरों की स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न में सबसे ज्यादा निवेश देखने को मिल रहा है। इसे अलावा, फंडिंग के पारंपरिक तौर-तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है, मसलन अब स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न में वैकल्पिक रूट मसलन क्राउडफंडिंग, रेवेन्यू आधारित फाइनेंसिंग, वेंचर डेट, बैंक लोन आदि के जरिये निवेश हो रहा है।

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