हम अक्सर डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के बारे में सुनते रहते है। बजट के मौके पर तो इन दोनों शब्दों का जानकार खूब इस्तेमाल करते है। बजट से पहले हमारा मकसद है कि हम आपको कठिन और जटिल शब्दों के मतलब बिल्कुल आसान शब्दों में बताएं।

हम अक्सर डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के बारे में सुनते रहते है। बजट के मौके पर तो इन दोनों शब्दों का जानकार खूब इस्तेमाल करते है। बजट से पहले हमारा मकसद है कि हम आपको कठिन और जटिल शब्दों के मतलब बिल्कुल आसान शब्दों में बताएं।
आसान है बजट, जी बिलकुल अगर अपनी जिन्दगी से जोड़ कर देखेंगे तो बिकुल आसान है बजट। आप कीसी होटल में जाते हैं। वहां खाने का बिल देते हैं और बिल में खाने की कीमत के साथ जुड़ा होता है सेवाओं का टैक्स, यानी सर्विस टेक्स। ये होता है इनडायरेक्ट टैक्स। यानी ये भरता तो होटल है, लेकिन पैसा आपकी जेब से जाता है। ऐसे ही कपड़े खरीदने या फिर घर का सामान खरीदते समय हमरा ध्यान नहीं जाता पर चीजों के दाम में वैट जुड़ा होता है। ऐसे ही कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी भी इनडायरेक्ट टैक्स हैं। आपके फिक्स्ड डिपॉजिट पर कटने वाला टीडीएस और सेस भी इनडायरेक्ट टैक्स के दायरे में आता है। जैसे अब सरकार ने स्वच्छ भारत कार्यक्रम की खातिर पैसे जुटाने के लिए 14 फीसदी सर्विस टैक्स पर आधा फीसदी सेस लगा दिया है।
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