वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) रखने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन (Chief Economic Advisor KV Subramanian) ने Economic Survey 2020-21 लॉन्च किया। इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण का पहला चैप्टर भारत की कोविड-19 पॉलिसी को समर्पित है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए भारत ने जो नीति अपनाई उससे 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत को रोका जा सका। देश की कोविड-10 पॉलिसी महामारी पर किए गए रिसर्च पर आधारित है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि लॉकडाउन को कड़ाई से लागू किए जाने को कारण अर्थव्यवस्था में निगेटिव ग्रोथ देखने को मिली, लेकिन आने वाले समय में पॉजिटीव ग्रोथ देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण सबसे ज्यादा देश का मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर प्रभवित हुआ है। हालांकि, एग्रीकल्चर सेक्टर पर कोरोना का ज्यादा असर नहीं पड़ा है और कृषि क्षेत्र में ग्रोथ देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि कोविड रेस्पांस पॉलिसी के बिना और अधिक लोगों की मौत हो सकती थी और इकोनॉमिक रिकवरी में और समय लग सकता था। उन्होंने कहा कि भारत ने लंबे अवधि में फायदा पाने के लिए छोटी अवधि के दर्द को सहा। देश में V शेप की इकोनॉमिक रिकवरी दिखाती है कि भारत ने कितनी परिपक्वता से इसका मुकाबला किया है।
अनलॉक में डिमांड को बढ़ावा देने वाले कदमों का ऐलान
केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत की नीति इस बात पर आधारित थी कि इकोनॉमिक ग्रोथ को दोबारा पटरी पर लाया जा सकता है, लेकिन लोगों के जीवन को नहीं। इसलिए शुरुआत में कड़े लॉकडाउन लगाए गए जिससे लोगों को जीवन बचा और तेज इकोनॉमिक रिकवरी में मदद मिली। उन्होंने कहा सरकार ने कोविड-19 से एकजुट होकर मुकाबला किया और फिर अनलॉक में डिमांड को बढ़ावा देने वाले कदमों का ऐलान किया। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि लॉकडाउन के बगैर भी कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक असर देखने को मिलता। लेकिन लॉकडान की वजह से को-ऑर्डिनेटेड रेस्पांस देखने को मिला, जिससे लोगों के जीवन और आजीविका को बचाने में मदद मिली।
सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग भारत के प्रति पक्षपाती
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग भारत की इकोनॉमी की बुनियादी स्थिति को नहीं दिखाती है। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार सॉवरेन रेटिंग एजेंसी ने विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को इंवेस्टमेंट के लिए माइनस BBB रेटिंग दी है, जो उनके पक्षपातपूर्ण रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कई संकेतक इस बात की पुष्टि करते हैं। साथ ही यह भी कहा कि सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को अपने मेथडोलॉजी (methodology) में सुधार करना और इसे अधिक पारदर्शी बनाया जान चाहिए जिससे भेदभाव नहीं किया जा सके।
हेल्थकेयर बजट को बढ़ाने की सलाह
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, हेल्थकेयर बजट के मामले में भारत की 189 देशों में 179वीं रैंकिंग है। अभी अमीर राज्य भी अपने GSDP का बहुत कम हिस्सा हेल्थकेयर पर खर्च कर रहे हैं। सर्वे में कहा गया है कि हेल् केयर पर पब्लिक स्पेंडिंग जीडीपी का 1 से बढाकर 3 फीसदी करने से आउट आफ पॉकेट एक्सपेंडिचर को 65 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी तक लाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि भारत में हॉस्पिटलाइजेशन रेट अभी 3 से 4 फीसदी है जो दुनियाभर के तमाम देशों से बहुत कम है। मिडिल इनकम वाले देशों में एवरेज हॉस्पिटलाइजेशन रेट 8 से 9% है, जबकि OECD देशों में यह 13 से 17% है। सर्वेक्षण में इंटरनेट के माध्यम से टेलीमेडिसिन को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
आयुष्मान भारत योजना से हेल्थकेयर बेहतर हुआ
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि स्वास्थ्य पर GDP का 3% तक खर्च करने से सरकार द्वारा बीमारियों पर किए जाने वाले खर्च में कटौती की जा सकती है और लोगों को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से हेल्थकेयर बेहतर हुआ है।
हेल्थकेयर के लिए अच्छे रेगुलेशन की जरूरत
केवी सुब्रमण्यन ने हेल्थकेयर में आने वाली समस्याओं को लेकर कहा कि बीमारी के इलाज में देश के प्राइवेट हॉस्पिटल सरकारी अस्पतालों के मुकावले कई गुना ज्यादा चार्ज वसूलते हैं। लेकिन ज्यादा पैसे लेने के बावजूद यह जरूरी नहीं है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इसलिए हेल्थकेयर के लिए अच्छे रेगुलेशन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (PMJAY) से लोगों को काफी राहत मिली है। लॉकडाउन में लोगों को इससे काफी मदद मिली है।
रिटेल और होलसेल महंगाई दोनों बढ़ी
उन्होंने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति आय में काफी असमानता है जिसका असर सामाजिक-आर्थिक संकेतकों (socioeconomic indicators) पर दिखता है। इसलिए देश को ग्रोथ पर फोकस करना चाहिए, ताकि आधिक से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति मिल सके। उन्होंने कहा कि रिटेल और होलसेल महंगाई दोनों में मूवमेंट देखने को मिला है। जहां CPI बढ़ रहा है वहीं WPI अभी अपने दायरे में ही है।
सरकार ने ऐतिहासिक लेबर रिफॉर्म किए
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-21 लेबर रिफॉर्म्स के कारण ऐतिहासिक रहा। 29 लेबर लॉ को या तो खत्म कर दिया गया या उन्हें तर्कसंगत बनाया गया और इन्हें 4 लेबर लॉ (Labour Laws) में आसानी से समाहित किया गया। इसमें कहा गया कि वित्त वर्ष 2018-19 में बेरोजगारी की दर में कमी आई।
स्मार्टफोन रखने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष 2020 में स्मार्टफोन रखने वाले छात्रों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। 2018 में जहां केवल 36.5% स्टूडेंट्स के पास स्मार्टफोन था। वहीं, 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 61.8% हो गया है।
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