सरकार भारतीय विदेशी बैंकों की स्थानीय शाखाओं को बैंकों के समान कर की पेशकश के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जिससे उनके लिए कर की दर लगभग 15 फीसदी अंक घटकर 22 फीसदी रह जाएगी। दो सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

सरकार भारतीय विदेशी बैंकों की स्थानीय शाखाओं को बैंकों के समान कर की पेशकश के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जिससे उनके लिए कर की दर लगभग 15 फीसदी अंक घटकर 22 फीसदी रह जाएगी। दो सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा, “हम इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। आगामी बजट (Budget) में इससे संबंधित एक घोषणा हो सकती है।” वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) कुछ विदेशी लेंडर्स द्वारा दिए गए एक प्रस्तुतीकरण पर विचार कर रहा है।
विदेशी बैंक देते हैं ज्यादा कर
विदेशी बैंक, घरेलू लेंडर्स की तुलना में खासा ज्यादा कर देते हैं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में Corporate Tax की दर में की गई कटौती उन पर लागू नहीं होती है। भले ही, यदि वे अपने ऑपरेशन को सब्सिडियरीज में बदल दें तो उन पर कम कर लग सकता है, लेकिन इससे जुड़ी जटिलताओं और नियामकीय चुनौतियों को देखते हुए कुछ ने ही यह विकल्प चुना है।
विदेशी बैंकों पर लगता है 40 फीसदी से ज्यादा कर
बैंकों ने सरकार से उनके साथ भारतीय बैंकों के समान व्यवहार करने के लिए कहा है, क्योंकि उन पर समान नियम और मानदंड लागू होते हैं। साथ ही वे लाभ और कर योग्य आय की गणना के लिए समान तरीका ही उपयोग करते हैं। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, “भले ही घरेलू बैंकों ने कर कानूनों के तहत 22 फीसदी (सरचार्ज और सेस अतिरिक्त) के कम दर वाले विकल्प को चुना है, लेकिन विदेशी कंपनियों को यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। इससे खासी असमानता की स्थिति पैदा हो गई है।” विदेशी बैंकों की शाखाओं पर कर की 40 प्रतिशत की मूल दर के अलावा सरचार्ज और सेस भी लिया जाता है।
दूसरे ज्यादातर देशों में होता है समान व्यवहार
अधिकारी ने कहा, “विदेशी कंपनियों की शाखाओं के लिए Corporate Tax के वैश्विक चलन की तर्ज पर घरेलू कंपनियों की तरह कॉरपोरेट कर की दरों में समानता होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि भारत को छोड़कर सभी BRICS देशों और ज्यादातर OECD देशों में स्थानीय व विदेशी कंपनियों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
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