Budget 2023: निर्मला सीतारमण नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का कर सकती हैं ऐलान

एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का ऐलान कर सकती है। सीएनबीसी -आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक इस पॉलिसी में पिछड़े इलाकों में इंडस्ट्री लगाने पर इंसेंटिव्स देने और रोजगार बढ़ाने पर फोकस हो सकता है

अपडेटेड Dec 26, 2022 पर 4:17 PM
सूत्रों के नए मुताबिक इंडस्ट्रियल पॉलिसी में सरकार पिछले इलाकों में नई इंडस्ट्री लगाने पर इनवेस्टमेंट सब्सिडी भी देगी।

Budget 2023 : सरकार अगले यूनियन बजट में नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का ऐलान कर सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। सीएनबीसी -आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक नई पॉलिसी में पिछड़े इलाकों में इंडस्ट्री लगाने वाली कंपनियों को इंसेंटिव्स दिया जा सकता है। नई औद्योगिक नीति में रोजगार बढ़ाने पर भी फोकस होगा।सीएनबीसी-आवाज के इकोनॉमिक एडिटर लक्ष्मण रॉय ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी में सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर या सर्विस सेक्टर में निवेश बढ़ाने पर फोकस कर सकती है।

सूत्रों के नए मुताबिक, इंडस्ट्रियल पॉलिसी में सरकार पिछले इलाकों में नई इंडस्ट्री लगाने पर सब्सिडी भी देगी। इसके लिए सब्सिडी लैंड बैंक बनाकर आसानी से जमीन मुहैया कराई जाएगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार इंडस्ट्रियल कल्सटर में Plug & Play infrastructure पर जोर देगी।

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नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत पीएफ, पेंशन फंड जैसे स्रोत से सस्ता फंड उपलब्ध कराने पर जोर होगा। इसमें जमीन के मालिक और इंडस्ट्री के साथ रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल को अपनाया जा सकता है। राज्यों की तरफ से स्टांप ड्यूटी, बिजली बिल, लैंड कनवर्जन चार्ज में छूट का  प्रस्ताव भी शामिल होगा।

सूत्रों के मुताबिक ड्रोन, स्टार्टअप, मेडिकल डिवाइस पर स्पेशल फोकस रहेगा। उद्योग मंत्रालय ने इंडस्ट्रियल पॉलिसी का मसौदा तैयार किया है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब सरकार पर अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने का दबाव है। पिछले हफ्ते IMF ने कहा था कि सरकार को अपना फिस्कल डेफिसिट कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

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कोरोना की महामारी के बाद सरकार को इकोनॉमी को सहारा देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को राहत देने पर अपना खर्च बढ़ाना पड़ा है। इस वजह से सरकार का राजकोषीय घाटा बहुत बढ़ गया है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि सरकार लंबे समय तक राजकोषीय घाटे को बहुत ज्यादा बनाए नहीं रख सकती। फाइनेंस मिनिस्टर अगले यूनियन बजट में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट घटा सकती हैं।

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