India budget  2024 : मिनिमम अल्टरनेट टैक्स पर तस्वीर साफ कर सकती हैं निर्मला सीतारमण

 India budget  2024 : MAT लागू होता है जिनकी टैक्स लायबिलिटी टैक्स छूट की स्कीमों की वजह से जीरो हो जाती है। सरकार जी20 और OECD सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिनिमम ग्लोबल टैक्स स्लैब के तहत लाने का ऐलान कर चुकी है। इंडिया में पहली बार एसेसमेंट ईयर 1988-89 में मैट लागू हुआ था। फिर इसे 1990 में वापस ले लिया गया। दोबारा 1997 में इसे लागू किया गया

अपडेटेड Jan 12, 2024 पर 1:20 PM
India budget 2024 : सरकार को ग्लोबल एंटी-बेस एरोजन रूल्स (GloBE) के मुताबिक अपने टैक्स के नियमों में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। इंडिया में उपलब्ध कुछ टैक्स इनसेंटिव GloBE के नियमों के मुताबिक नहीं हैं।

India budget 2024 : वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman अंतरिम बजट में मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स (MAT) में बदलाव का ऐलान कर सकती हैं। उन कंपनियों पर MAT लागू होता है जिनकी टैक्स लायबिलिटी टैक्स छूट की स्कीमों की वजह से जीरो हो जाती है। सरकार जी20 और OECD सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिनिमम ग्लोबल टैक्स स्लैब के तहत लाने का ऐलान कर चुकी है। इसमें कंपनी के प्लेस ऑफ ऑरिजिन से किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। पिछले साल इंडिया की अध्यक्षता में हुई जी20 की शिखर बैठक में सदस्य देश ग्लोबल टैक्स रिफॉर्म्स लागू करने के लिए तैयार हो गए थे। इसमें ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स रेट लागू करने का प्रस्ताव है। साथ ही डिजिटल इकोनॉमी पर टैक्स के नियमों का भी प्रस्ताव है। इस रिफॉर्म्स को टू-पिलर सॉल्यूशन कहा गया है।

बजट 2024 : जी20 की बैठक में सदस्य देशों में बनी थी सहमति

सॉल्यूशन के पहले पिलर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर टैक्स लगाने के कुछ अधिकार को बनाए रखने का प्रस्ताव है। खासकर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर यह लागू होगा, जो टैक्स चुकाने से बचने के लिए उन देशों से अपना कामकाज चलाती हैं, जहां टैक्स बहुत कम है या नहीं है। दूसरे पिलर के तहत रिफॉर्म्स का जो प्रस्ताव है वह 15 फीसदी के ग्लोबल मिनिमम टैक्स से जु़ड़ा है। इसका मकसद कॉर्पोरेट इनकम टैक्स लायबिलिटी से बचने वाली कंपनियों को टैक्स के दायरे में लाना है।


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बजट 2024 : सरकार को MAT के नियमों में बदलाव करना होगा

सरकार को ग्लोबल एंटी-बेस एरोजन रूल्स (GloBE) के मुताबिक अपने टैक्स के नियमों में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। इंडिया में उपलब्ध कुछ टैक्स इनसेंटिव GloBE के नियमों के मुताबिक नहीं हैं। हालांकि, इंडिया में मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स रीजीम बहुत पहले लागू हो चुकी है। फिर भी, इसमें कुछ बदलाव करने की जरूरत है। इंडिया में पहली बार एसेसमेंट ईयर 1988-89 में मैट लागू हुआ था। फिर इसे 1990 में वापस ले लिया गया। दोबारा 1997 में इसे लागू किया गया। तब से मैट के नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। इसे इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 115जेबी के प्रावधानों के तहत लगाया जाता है।

बजट 2024 : मैट का मतलब क्या है?

मैट वह टैक्स है, जिसे उस कंपनी को चुकाना पड़ता है, जिसकी टैक्स लायबिलिटी एग्जेम्प्शंस और दूसरे तरह की छूट की वजह से जीरो हो जाती है। इसका मकसद उन कंपनियों को टैक्स के दायरे में लाना है, जो इनकम टैक्स के नियमों के तहत उपलब्ध टैक्स बेनेफिट का फायदा उठाने की वजह से किसी तरह का टैक्स नहीं चुकाती हैं। ऐसी कंपनियों को जीरो टैक्स कंपनी कहा जाता है। मैट के तहत 15 फीसदी टैक्स के साथ ही सरचार्ज और सेस चुकाना पड़ता है। यह कंपनी को इंडिया में हुए प्रॉफिट पर लगता है।

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